धारचूला (पिथौरागढ़)। नोटीफाइड लाइन को छियालेख से जौलजीबी करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। धारचूला के विभिन्न संगठनों ने इस मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है।
एसडीएम के माध्यम से भेजे गए पत्र में सीमांत के संगठनों ने लिखा है कि भारत-नेपाल एवं तिब्बत की त्रिकोणीय सीमा को देखते हुए भारत सरकार ने उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले के चीन सीमा से लगे धारचूला क्षेत्र को नोटीफाइड क्षेत्र घोषित किया था। इसके तहत कोई भी बाहर का व्यक्ति केवल वैध परमिट के आधार पर ही धारचूला में प्रवेश कर सकता था।
पत्र में कहा है कि 1990 के दौरान तमाम तरह की गतिविधियां बढ़ने पर सीमांत के लोगों ने आंदोलन किया था। तब अवैध रूप से रह रहे कई संदिग्ध लोगों को क्षेत्र से बाहर भी किया गया था। बाद में असंवैधानिक तरीके से तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने नोटीफाइड क्षेत्र को जौलजीबी से हटाकर 80 किमी दूर छियालेख कर दिया था। नोटीफाइड एरिया जौलजीबी से छियालेख करने के बाद बाहरी लोगों की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। इससे सीमांत के लोग स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि भारत-चीन युद्ध 1962 में सीमांत के लोगों ने पीठ पर सैन्य साजो सामान ढोकर सेना को सहयोग दिया था। इसके बावजूद नोटीफाइड एरिया को फिर से जौलजीबी करने की सीमांत के लोगों की मांग को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। पत्र भेजने वालों में रं कल्याण संस्था, अणवाल समुदाय के पदाधिकारियों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि शामिल हैं।