इनरलाइन को छियालेख से वापस जौलजीबी लाए जाने की मांग को लेकर व्यापारी लामबंद हो गए हैं। व्यापारियों ने सोमवार को एसडीएम के माध्यम से केंद्रीय गृहमंत्री को ज्ञापन भेजा और देश की सुरक्षा के लिहाज से तत्काल इनरलाइन शिफ्ट करने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि इनरलाइन के प्रतिबंध 1998 में समाप्त हो गए थे। तब से धारचूला में बाहरी लोगों की गतिविधि तेजी से बढ़ी है।
यहां पर अपराधों में कई बार बाहरी लोगों का हाथ सामने आया। यदि इनरलाइन जौलजीबी शिफ्ट हो जाए तो बाहरी लोगों को धारचूला में प्रवेश के लिए अनुमति पत्र लेना होगा। व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा ने कहा कि अब इस मुद्दे पर व्यापारी जबर्दस्त आंदोलन छेड़ेंगे।
व्यापार संघ ने कहा है कि धारचूला तिब्बत और नेपाल सीमा से सटा हुआ है। इस स्थान की सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए। 1998 से पहले जब इनरलाइन जौलजीबी में थी तब कम से कम बाहरी लोगों की आवाजाही नहीं होती थी।
अब तो धारचूला में कई संदिग्ध भी प्रवेश कर रहे हैं। व्यापार संघ ने कहा है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर अब चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा। व्यापारी इनरलाइन को जौलजीबी वापस लाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। ज्ञापन देने वालों में लक्ष्मण बहादुर, राजेश कुटियाल, श्याम चंद्र खर्कवाल, भीम सिंह रावत, ओमप्रकाश कापड़ी, महिमन सिंह ह्यांकी, प्रकाश गुंज्याल समेत अन्य व्यापारी थे। एसडीएम एसके पांडे ने कहा है कि व्यापारियों की भावना से केंद्र सरकार को अवगत कराया जाएगा।