धारचूला की तर्ज पर मुनस्यारी में भी अधिसूचित क्षेत्र (इनरलाइन) को शिफ्ट करने की मांग उठने लगी है। इस समय इनरलाइन मिलम के पास लाखुरीभेल में है, जबकि 1985 तक मुनस्यारी जाने के लिए तेजम से ही अधिसूचित क्षेत्र की सीमा शुरू हो जाती थी।
1985 में इसे शिफ्ट कर गिरगांव, उसके बाद लीलम और 1998 में इसे मिलम शिफ्ट कर दिया गया। धारचूला के लोग इस समय क्षेत्र की सुरक्षा के मद्देनजर इनरलाइन को छियालेक से वापस जौलजीबी लाने की मांग उठा रहे हैं। ठीक इसी तर्ज पर मुनस्यारी के कुछ लोग इनरलाइन को मिलम से मुनस्यारी शिफ्ट करने के पक्ष में हैं।
हालांकि, मुनस्यारी में इस मुद्दे को लेकर कोई संपर्क अभियान या आंदोलन तो शुरू नहीं हुआ, लेकिन लोग चाहते हैं कि सुरक्षा कारणों से इनरलाइन को शिफ्ट किया जाना जरूरी है।
समाजसेवी देवेंद्र देवा का कहना है कि इनरलाइन शिफ्ट करने के लिए सरकार के सामने प्रस्ताव रखा जाएगा। वह कहते हैं कि सीमांत की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि कुछ कड़े नियम बनाए जाने चाहिए।