रेशम के कीटों की जानकारी लेते ऊपरी रामगंगा घाटी के किसान
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ऊपरी रामगंगा घाटी में सिलचमू से लेकर बांसबगड़ तक के इलाके में रेशम उत्पादन की पहल शुरू हो गई है। इस घाटी के 69 किसान क्लबों को रेशम उत्पादन से जोड़ा जाएगा। फिलहाल 25 लोगों को राजकीय रेशम फार्म मुवानी में प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 150 किसान पहले से ही रेशम कीट पालन के काम से जुड़े हैं। मुवानी की गर्म घाटी में शहतूत का उत्पादन खूब होता है। रेशम के कीट को शहतूत की पत्तियों के सहारे ही पाला जाता है।
राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से उत्तरापथ सेवा संस्था यह काम कर रही है। राजकीय रेशम केंद्र मुवानी के प्रभारी वीएस रावत ने किसानों को रेशम कीट पालन की जानकारी दी। मुवानी में रेशम कीट पालन का काम 20 वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब तक इसका आम किसान के बीच प्रचार नहीं हो पाया। उत्तरापथ संस्था के निदेशक राजेंद्र पंत ने बताया कि सभी किसान क्लबों को रेशम उत्पादन की तकनीक सिखाई जाएगी। पहले चरण में सिलचमू से बांसबगड़ तक और दूसरे चरण में पांखू घाटी में रेशम पालन के बारे में बताया जाएगा।
उनका कहना है कि रेशम उत्पादन और रेशम कीट पालन के लिए इन घाटियों में माहौल उपयुक्त है। शहतूत के पौधों का रोपण कर उनमें रेशम के कीट तैयार किए जाएंगे। जल्दी ही रेशम का तागा तैयार करने वाली यूनिट भी लगाई जाएगी। इस मौके पर राधा खनका, पूरन भट्ट, पंकज कार्की, निर्मल पंत, मोहन राम, लक्ष्मी चौहान आदि थे।