धारचूला में आयोजित कार्यशाला में पहुंचे अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि
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भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की कार्यशाला में जम्मू कश्मीर, हिमाचल, सिक्किम और उत्तराखंड में चल रही सिक्योर हिमालय योजना के तहत उच्च हिमालयी इलाकों के पारिस्थितिकी तंत्र और हिम तेंदुए की अद्वितीय जैव विविधता के संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई। संस्थान ने जीईएफ वित्त पोषित यूएनडीपी एमओईएफ और सीसी परियोजना के तहत खंड विकास, बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, लोनिवि, दारमा व्यास और चौदास के प्रधानों के साथ कार्यशाला आयोजित की।
रं म्यूजियम में हुई कार्यशाला में संस्थान के परियोजना अन्वेषक डॉ.एस सत्यकुमार, विषय विशेषज्ञ डॉ ऐश्वर्या माहेश्वरी आदि ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन विभाग के सहयोग से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रह रहे स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है। साथ ही दारमा व्यास और चौदास घाटियों में चल रही परियोजनाओं की जानकारी सरकार तक पहुंचाई जानी है। बैठक में क्षेत्र के प्रधानों ने उच्च हिमालयी इलाकों में भालू और लंगूरों द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी मानस मित्तल, विशिष्ट अतिथि संस्थान के परियोजना प्रमुख डॉ.जीएस रावत, डॉ. महेंद्र जायसवाल, एई लोनिवि गोविंद जनोटी, बाल विकास परियोजना अधिकारी गायत्री कुटियाल, ग्राम प्रधान ममता सेलाल, मीरा ग्वाल, सुरेंद्र सीपाल, आशा बोनाल, लक्ष्मी रायपा, किशन बोनाल, दान सिंह बोनाल, गुलाब कुटियाल, मंजू कुटियाल, गंगोत्री नपलच्याल, बॉयोलॉजिस्ट इरीना दास सरकार आदि मौजूद थे।