झूलाघाट सीमा पुल पर फंसा भारतीय परिवार।
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। यूूपी की मां-बेटी तीन दिन से झूलाघाट कस्बे में फंसी हैं। वह अपने परिवार के मुखिया के पास बैतड़ी जाना चाहते हैं लेकिन नेपाल प्रशासन के अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। मां-बेटी ने भारतीय प्रशासन से उन्हें नेपाल भेजने की गुहार लगाई है।
थाना नहटौर जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश निवासी शाहिदा के पति राशिद की 25 वर्षों से नेपाल में रजाई गद्दे की दुकान है। वह मार्च में अपने घर गईं थी। तब से लॉकडाउन लगने के कारण वह नेपाल नहीं लौट सकी थी। पांच दिन के लिए सीमा पुल खुलने की सूचना पर वह तीन दिन पहले बेटी सलमा के साथ झूलाघाट पहुंचीं। दोनों के पास सभी वैधानिक कागजात भी हैं। इसी कारण भारतीय प्रशासन और एसएसबी मां-बेटी को नेपाल भेजना चाहती है, लेकिन सीमा पार जूलाघाट में बैठे नेपाली अधिकारी दोनों को नेपाल नहीं आने दे रहे हैं। दोनों ने मजिरकांडा के राजस्व उपनिरीक्षक सहित एसएसबी के अधिकारियों से भी उन्हें नेपाल भेजने की गुहार लगाई है। सलमा का कहना है भारत सरकार नेपाल के लोगों को सहूलियत देते हुए पुल खोल रही है लेकिन नेपाल अपने यहां बसे भारतीय लोगों को कागजात दिखाने के बाद भी परेशान कर रहा है। वहीं नायब तहसीलदार पंकज चंदोला ने कहा कि परिवार का प्रार्थना पत्र मिलने के बाद बैतड़ी प्रशासन से बात की जाएगी।
शीघ्र खोले जाएं सभी झूलापुल
झूलाघाट। महाकाली की आवाज के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा है कि नेपाल ने महेंद्रनगर सहित देश के अधिकांश सीमाओं को आवाजाही के लिए पहले ही खोल दिया है। लेकिन धारचूला, जौलजीबी, झूलाघाट सहित सभी पैदल पुल अब भी बंद हैं। सुदूर पश्चिमांचल को जोड़ने वाले इन्हीं नाकों से दोनों देशों के लोग पैदल आवागमन करते हैं।