सर्जिकल ऑपरेशन के बाद भारतीय सीमाओं पर बढ़े तनाव का असर इस बार भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार पर भी पड़ने वाला है। तिब्बत की मंडी तकलाकोट गए भारतीय व्यापारियों को 15 अक्तूबर तक वापस लौटने के आदेश हो गए हैं। व्यापार की अवधि 31 अक्तूबर तक तय होती है, लेकिन तनाव के मद्देनजर इसे 15 दिन पहले ही बंद किया जाएगा।
भारत-तिब्बत व्यापार के सहायक ट्रेड अधिकारी पीएस कुटियाल ने बताया कि तकलाकोट गए हुए सभी व्यापारियों को वापस लौटने के लिए कह दिया गया है। इस समय तिब्बत की मंडी में 47 व्यापारी और 50 हेल्पर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी को 31 अक्तूबर तक के लिए ट्रेड पास जारी किए गए हैं, लेकिन अब व्यापारियों को 15 अक्तूबर तक लिपुलेख दर्रा पार कर भारतीय क्षेत्र में आना होगा। 1992 में शुरू हुए भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सिर्फ 2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों के कारण ही व्यवधान आया था। ओलंपिक के कारण भारतीय व्यापारियों को तिब्बत की मंडी जाने की अनुमति नहीं मिली थी। अन्य वर्षों में व्यापार जून से 31 अक्तूबर तक बिना किसी व्यवधान के जारी रहा। सहायक ट्रेड अधिकारी ने बताया कि हर साल व्यापार की अवधि वैसे तो 30 सितंबर तक तय होती है, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय इसे हमेशा एक माह के लिए बढ़ाता रहता है।
बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर व्यापारियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसे देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। इस आदेश के बाद व्यापारियों में हलचल मची है। वह अब सामान समेटने की तैयारी में लग गए हैं। पता चला है कि अभी व्यापारियों का काफी सामान नहीं बिक पाया है। इस महीने व्यापार अच्छा होने की उम्मीद में व्यापारियों ने काफी मात्रा में सामान तकलाकोट पहुंचा दिया था। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भाग लेने वाले व्यापारी लिपुलेख दर्रा पार कर तिब्बत में प्रवेश करते हैं।