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भारतीय टीम में चयन की उम्मीद थी

Sat, 07 Jan 2017 10:17 PM IST
दिगंबर रौतेला/कालिका रावल/अमर उजाला, गंगोलीहाट/पिथौरागढ़
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क्रिकेटर ऋषभ पंत का गंगोलीहाट के पाली गांव में स्थित पैतृक आवास - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय टी-20 टीम के नए सितारे ऋषभ पंत के गृह क्षेत्र के लोगों को ऋषभ के भारतीय टीम में चुने जाने की पहले से ही उम्मीद थी। गांव के लोगों को विश्वास है कि उनके गांव का ऋषभ जल्द ही वन-डे और टेस्ट टीम में जगह बना लेगा।
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दिसंबर 2015 में जब ऋषभ पंत का चयन देश की अंडर-19 टीम में हुआ तो पाली भेरंग का आमडाली अचानक चर्चा में आ गया। गृहक्षेत्र के लोग तभी से ऋषभ के भारतीय टीम से खेलने के सपने बुनने लगे थे। ऋषभ ने 6 फरवरी 2016 को नामीबिया के खिलाफ शानदार शतक ठोका था। उसी दिन दिल्ली डेयरडेवल्स ने ऋषभ को 1.9 करोड़ रुपए में आईपीएल के लिए खरीद लिया। इलाके के लोगों को तभी से लगने लगा था कि ऋषभ एक दिन भारतीय टीम का हिस्सा जरूर बनेगा।

हाल के रणजी प्रदर्शन के बाद ऋषभ के भारतीय टीम में चुने जाने की उम्मीद पुख्ता होने लगी। दिल्ली की ओर से रणजी खेलने वाले ऋषभ ने इस सत्र में 972 रन ठोके हैं। घरेलू क्रिकेट में 48 गेंद पर शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज भी ऋषभ बने हैं। हाल में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई टेस्ट सिरीज में जब नियमित विकेटकीपर रिद्धिमान साहा चोटिल होकर बाहर हो गए थे। तब भी 21 वर्षीय ऋषभ पंत के नाम की चर्चा हुई थी। एयरफोर्स में कार्यरत ऋषभ के रिश्ते के चचेरे भाई भूपेश पंत ने बताया कि ऋषभ को क्रिकेट का जुनून है। वह बचपन से ही देश की टीम के लिए खेलने का सपना देखते हुए आगे बढ़ रहा था। गांव के लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही उनके गांव का सितारा देश की टेस्ट और वन-डे टीम में खेलता नजर आएगा।
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ऋषभ के दादा 25 साल पहले रुड़की चले गए थे 
ऋषभ के दादा चंद्र बल्लभ पंत करीब 25 साल पहले पाली से परिवार सहित रुड़की चले गए थे। ऋषभ पंत के पिता राजेंद्र पंत रुड़की में निजी स्कूल चलाते हैं। ऋषभ के दादा चंद्रबल्लब पंत के भाई लक्ष्मी दत्त पंत, लोकमणि पंत और बसदेव पंत का परिवार पाली में ही रहता है। पाली निवासी जीवन चंद्र पंत बताते हैं कि ऋषभ के परिजनों का गांव से बहुत लगाव है। पाली के आमडाली स्थित पुराने मकान में ऋषभ के बुजुर्गों की यादें शेष हैं।

ऋषभ पांच साल पहले गांव आया था
ऋषभ का परिवार ईष्ट देवताओं की पूजा के लिए गांव आता रहता है। ऋषभ के चचेरे भाई भूपेश पंत ने बताया कि ऋषभ के पिता राजेंद्र पंत और माता सरोज पंत लगभग हर साल गांव आते हैं। अंडर-19 टीम में चयन के बाद वर्ष 2016 में ऋषभ की माता सरोज पंत गांव में पूजा के लिए आईं थीं। वर्ष 2012 में ऋषभ भी माता, पिता के साथ गांव आया था। भूपेश के अनुसार ऋषभ बहुत ही मिलनसार और मृदुभाषी है।

दिनभर देते रहे एक-दूसरे को बधाइयां
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। देश की टी-20 क्रिकेट टीम में चुने गए युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के गांव पाली (भेरंग) के लोग जश्न में डूबे हैं। शुक्रवार को ऋषभ के टीम में चुने जाने के बाद से ही एक-दूसरे को बधाई दे रहे गांव के लोगों ने शनिवार सुबह गांव में एकत्र होकर ऋषभ के भारतीय टी-20 टीम में चयन की खुशी मनाई। ऋषभ की उपलब्धि से समूचे गंगोलीहाट क्षेत्र में खुशी है। ऋषभ मूल रूप से पाली गांव के आमडाली के रहने वाले हैं। ऋषभ के टीम में चुने जाने की सूचना के बाद गांव के लोगों ने देर रात तक खुशियां बांटी। शनिवार सुबह से ही एक बार फिर जश्न का सिलसिला शुरू हो गया। गांव के बच्चे, जवान, बुजुर्ग, महिलाएं आमडाली के मैदान में एकत्र होकर भारत माता की जय, ऋषभ पंत जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। बच्चे और युवा इतने उत्साहित थे कि क्रिकेट का बल्ला लेकर आमडाली के मैदान में पहुंचे थे। गांव की महिलाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिला रहे थे, बधाई दे रहे थे। गांव के भूपेश पंत, नवल पंत, मदनमोहन पंत, राहुल पंत, किशोर कुमार, भुवन राम, गोपाल राम, भगवती प्रसाद पंत, लोकेश पंत, मनोज पंत हर किसी की जुबां पर ऋषभ का ही नाम था। 
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