पिथौरागढ़। सीमांत जिले में जड़ी-बूटी उत्पादन किसानों की आजीविका का बेहतर जरिया बन रहा है। कनालीछीना और सूनाकोट क्षेत्र के 20 से अधिक किसानों को भेषज संघ ने जड़ी-बूटी उत्पादन से जोड़ा है। स्वरोजगार से जुड़कर हर किसान सालाना 60 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहा है।
जिला भेषज सहकारी संघ जड़ी-बूटी को बढ़ावा देने के लिए काश्तकारों को जड़ी-बूटी के बीज और पौधे उपलब्ध करा रहा है। जिला भेषज संघ अधिकारी सुरेश चंद्र ओली ने बताया कि जिले के सूनाकोट और कनालीछीना में करीब 30 किसानों को जड़ी-बूटी उत्पादन से जोड़ा गया है। किसान रीठा, बड़ी इलायची, जंबू, तिमूर, तेजपात, आंवला, गंद्रायण, तुलसी सहित अन्य जड़ी-बूटियों का उत्पादन कर सालाना 60 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। स्थानीय बाजारों में इन जड़ी-बूटियों की काफी मांग है। संघ के माध्यम से इन उत्पादों को टनकपुर निर्यात किया जा रहा है। संवाद
नर्सरी में तैयार हो रहे हैं पौधे
पिथौरागढ़। जिला भेषज संघ अधिकारी सुरेश चंद्र ओली ने बताया कि सूनाकोट में एक, कनालीछीना में दो नर्सरी किसानों ने स्थापित की है। किसान इनमें जड़ी-बूटियों की पौध तैयार कर इन्हें बेचकर अच्छी आय कमा रहे हैं। अन्य किसानों को भी योजना से जोड़ने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि विभाग काश्तकारों को जड़ी-बूटी के उत्पादन के लिए प्रशिक्षण देता है। संवाद