मदरमा में चार महीने पहले हुए भूस्खलन से प्रभावित 65 वर्षीय त्रिलोक सिंह को मकान बनाने के लिए सरकारी खजाने से एक धेला तक नहीं मिला। बुजुर्ग इस ठंड के मौसम में अपने बेटे और बहू के साथ क्षतिग्रस्त मकान में रहने को मजबूर है। मकान पर प्लास्टिक शीट, घास और टिन की चादर डालकर किसी तरह ठंड से बचने की जुगत की गई है।
12 अगस्त 2017 को बंगापानी तहसील के मदरमा में भूस्खलन से तीन लोगों की मौत हो गई थी। हादसे में बुजुर्ग त्रिलोक सिंह के परिवार में कोई जनहानि तो नहीं हुई लेकिन त्रिलोक सिंह का मकान रहने लायक नहीं रह गया। मकान की एक ओर की दीवार और छत क्षतिग्रस्त हो गई थी। त्रिलोक सिंह आपदा मद से मदद देने की गुहार लगाते-लगाते थक गए हैं, लेकिन सरकारी इमदाद नहीं मिली। हालांकि सरकारी अमला मकान की फोटो कई बार खींच चुका है।
इस क्षतिग्रस्त मकान में बुजुर्ग त्रिलोक सिंह अपने एक पुत्र और बहू के साथ रहते हैं।
उनके दो बेटे बाहर किसी कंपनी में छोटी-मोटी नौकरी करते हैं। उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। उनकी माली हालत मकान बनाने लायक नहीं हैं। बंगापानी के सामाजिक कार्यकर्ता उमेश धामी बताते हैं कि त्रिलोक सिंह को आपदा मद से मदद दिलाने के लिए वह स्वयं प्रशासनिक और राजस्व अमले के कई चक्कर काट चुके हैं। उन्हें भी आश्वासन देकर टरका दिया जाता है।
सरकार क्या ऐसे ही मदद करती है
बुजुर्ग त्रिलोक सिंह कहते हैं कि कई अधिकारी मकान का निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन उनको किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। वह सवाल करते हैं कि सरकार क्या आपदा प्रभावितों की इसी तरह मदद करती है।
आपदा के चार महीने के बाद भी मकान बनाने के लिए बुजुर्ग त्रिलोक सिंह को मदद न मिलना आपदा प्रभावित परिवार की जिंदगी से खेलने के समान है। आपदा प्रभावित परिवार इस ठंड में क्षतिग्रस्त मकान में रह रहा है। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। त्रिलोक सिंह को मकान दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। -हरीश धामी, विधायक, धारचूला
प्रभावित को किन कारणों से मदद नहीं मिली है, इसकी पड़ताल कराई जाएगी। यदि आपदा प्रभावित को मदद नहीं मिली होगी तो शीघ्र राहत राशि दी जाएगी। -सी रविशंकर, जिलाधिकारी, पिथौरागढ़