मदकोट के बसंतकोट-जौलढूंगा जाने वाली सड़क नाले में तब्दील, जोखिम उठाकर हो रहा आवागमन
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धारचूला, मुनस्यारी, बंगापानी क्षेत्र में बरसात हर साल आपदा लेकर आती है, लेकिन इस बार जुलाई की शुरुआत में ही प्रकृति ने जो तांडव मचाया है, उससे लोग सिहर उठे हैं। अतिवृष्टि ने गोरीपार (मुनस्यारी) क्षेत्र के बसंतकोट, जौलढुंगा के लोगों को मुसीबत में डाल दिया है। मदकोट से बसंतकोट-जौलढुंगा जाने वाली सड़क नाले में तब्दील हो गई है, लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
जो जुलाई की अतिवृष्टि ने गोरीपार क्षेत्र को शेष दुनिया से अलग-थलग कर दिया है। मदकोट से बसंतकोट-जौलढुंगा के लिए बनी 10 किमी सड़क नाले में तब्दील हो गई है। सड़क बड़े-बड़े बोल्डरों से पटी हुई है। बसंतकोट के पास सड़क के स्थान पर बड़ा सा नाला बह रहा है। इससे बसंतकोट, जौलढूंगा, बोथी, भटकूड़ा, फाफा, वादनी, उछैती, ढीलम, कुलथम, फल्यांटी आदि गांवों की करीब पांच हजार आबादी का संपर्क कट गया है। इलाके के लोगों को मदकोट, मुनस्यारी आने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। क्षेत्र में राशन समेत अन्य जरूरी सामान की किल्लत हो गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता हीरा चिराल ने बताया कि गोरी नदी पर बनी लकड़ी की पुलिया बहने से लोगों की मुसीबत और बढ़ी है। गोरीपार संघर्ष समिति के अध्यक्ष राधेश्याम जोशी, क्षेत्र पंचायत सदस्य दान सिंह कोरंगा, बसंतकोट के प्रधान डिगर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता पुष्कर सिंह नेगी कहते हैं कि यातायात बहाल करने के लिए सरकार और प्रशासन को युद्धस्तर पर कार्य करना चाहिए। अन्यथा गोरीपार क्षेत्र के लोगों की मुसीबत और बढ़ जाएगी।
फिर गरारी बनी सहारा
गोरीपार (बसंतकोट-जौलढूंगा-उच्छैती आदि) क्षेत्र के लिए दो साल पहले 10 किमी लंबी सड़क का निर्माण हुआ तो लोगों को राहत मिली थी। इससे पहले बरसात के दिनों में लोग गोरी नदी में गरारी (ट्राली) डालकर आवागमन करते थे। दो जुलाई को सड़क ध्वस्त होने से एक बार फिर लोगों को गरारी का सहारा लेना पड़ रहा है।