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इटली में भी बेड़ू पाको लोकगीत गूंजा

Wed, 14 Jun 2017 10:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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रंगमंच कलाकार भूपेश जोशी - फोटो : अमर उजाला
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भारतेंदु नाट्य अकादमी दिल्ली से रंगमंच का प्रशिक्षण लेने वाले और इस समय दिल्ली में गाथा रंगमंच संस्था का संचालन कर रहे भूपेश जोशी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के दौरान इटली में बेड़ू पाको बारामासा, नरैण काफल पाको चैत मेरी छैला गीत के स्वर गूंजे थे। भूपेश जोशी 19 से 29 मई तक इस नाट्य महोत्सव में भाग लेने इटली गए थे। उन्होंने बताया कि बेड़ू पाको गीत को जब मंच पर उनके साथी कलाकार गाने लगे तो महोत्सव में पहुंचे कई विदेशी कलाकारों के पांव खुद ही थिरकने लग गए। इन दिनों पिथौरागढ़ के दौरे पर आए भूपेश ने बताया कि लोक संस्कृति पर आधारित रंगमंच की व्यापक संभावना है।
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उन्होंने बताया कि थियेटर का नया दर्शक वर्ग पूरे देश में तैयार हो रहा है। अब लोग फिल्मों की कहानियों से ऊब चुके हैं। वह मानते हैं कि रंगमंच के असली केंद्र छोटे शहर, गांव ही हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में तो सिर्फ इनका मंचन होता है। 1993 से लगातार थियेटर से जुड़े भूपेश जोशी ने बताया कि जल्दी ही पिथौरागढ़ में बड़े स्तर का नाट्य महोत्सव कराएंगे। इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि वह इस समय संस्कृत कवि भास के नाटक चारूदत्तम का हिंदी रूपांतर कर मंचन की तैयारी कर रहे हैं। 42 वर्षीय भूपेश जोशी मूल रूप से गंगोलीहाट के निवासी हैं। उनको कुमाऊं की संस्कृति के संरक्षण की बड़ी चिंता है। 

बालरंग कार्यशाला का शुभारंभ
रंगमंच कलाकार भूपेश जोशी ने हर बार की तरह इस बार भी यहां बालरंग कार्यशाला शुरू कर दी है। गांधी विद्यापीठ में आयोजित की जा रही इस कार्यशाला को 17 जून तक चलाया जाएगा। इस दौरान बच्चों को रंगमंच की बारीकी, अभिनय कौशल, रचनात्मकता, पर्यावरण जागरूकता की जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला के संचालन में रंगकर्मी कैलाश कुमार, गांधी विद्यापीठ के प्रधानाचार्य भुवन जोशी, प्रबंधक ललित पंत आदि सहयोग दे रहे हैं।
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