जैसे ही शहीद शंकर सिंह महरा का पार्थिव शरीर दशाइथल हेलीपेड से पैतृक गांव नाली को रवाना हुआ लोग हाथ में फूल लेकर सेना के वाहन पर चढ़ाने लगे। गंगोलीहाट, कोठेरा, भंडारी गांव, भूलीगांव, बोकटा, चौनाला, चौड़ा, दूनी, नाली में सैकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर आकर फूलों की वर्षा करने लगे और शहीद की जय-जयकार करने लगे। जब तक सूरज चांद रहेगा शंकर तेरा नाम रहेगा, भारत माता की जय के नारों से आसमान गूंज उठा।