जाखपंत के लोग 18 किमी दूर जिला मुख्यालय आकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। गांव के लोगों ने कहा है कि सरकार यदि जाखपंत में खनन जरूरी समझती है तो गांव को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया जाए।
जाखपंत की ग्राम प्रधान बबीता पंत और वन पंचायत सरपंच राम प्रसाद के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुंचे लोगों ने नारेबाजी के बीच सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रभारी जिलाधिकारी विनोद गिरी गोस्वामी को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि जाखपंत गांव लंबे समय से अवैध खनन के कार्य से त्रस्त है। रविवार को एक बाहरी व्यक्ति ने गांव में आकर जाखपंत में खनन पट्टा स्वीकृत होने की सूचना दी। उक्त व्यक्ति गांव के जिस स्थान पर खनन पट्टा स्वीकृत होने की जानकारी दे रहा है, उस स्थान का दो वर्ष पूर्व तत्कालीन उपजिलाधिकारी नरेश चंद्र दुर्गापाल ने राजस्व टीम के साथ जायजा लिया था। उस स्थान पर मात्र ढाई नाली जमीन नाप बताई गई थी। आज उस स्थान पर 13 नाली जमीन में खनन पट्टा जारी होने की बात कही जा रही है, शेष जमीन कहां से आई यह जांच का विषय है।
इन लोगों ने कहा है कि ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पास किया है कि कोई भी व्यक्ति गांव में जमीन खरीदकर खनन का धंधा नहीं करेगा, कृषि कार्य के लिए जमीन खरीद सकता है। कहा है कि खनन से गांव के जल, जंगल, जमीन को क्षति पहुंच रही है। गांव में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इन लोगों ने कहा है कि गांव में खनन पट्टा जारी किया गया तो ग्रामवासी आंदोलन छेड़ देंगे। गांव में किसी भी कीमत में खनन का काम नहीं होने दिया जाएगा। इन लोगों ने मुख्यमंत्री को भी इस संबंध में ज्ञापन भेजा है। प्रदर्शन में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य फकीर सिंह धामी, सतीश पंत, देवेंद्र पंत, ललित मोहन, कृष्ण दत्त पंत, मनोज पंत, जीवन राम समेत तमाम लोग शामिल थे।