भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के सौजन्य से झूलाघाट में चल रही 25 दिनी रंगमच कार्यशाला का समापन हो गया है। समापन पर मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदगाह का सजीव मंचन किया। इस कहानी ने लोगों को भावविभोर कर दिया।
ईदगाह की कहानी छोटे बच्चे हामिद और उसकी दादी अमीना के इर्दगिर्द घूमती है। हामिद की जिद के बाद उसकी दादी उसे ईदगाह में भेजने के लिए तैयार होती हैं। ईदगाह में जहां अन्य बच्चे खिलौने, मिठाई, जलेबी, गुब्बारे इत्यादि खरीदते हैं, वहीं हामिद अपनी दादी के लिए एक चिमटा ले आता है। हामिद देखता था कि रोटी बनाते समय उसकी दादी के हाथ जल जाते थे। कहानी के भावार्थ और नन्हे मन की पीड़ा को देख लोगों की आंखें रुआंसी हो उठी।
बाल मनोविज्ञान पर आधारित प्रेमचंद की उत्कृष्ट रचना का निर्देशन राजीव पांडेय ने किया। सह निर्देशन विप्लव भट्ट, वेशभूषा विक्रम सिंह, प्रकाश परिकल्पना हेम पंत, संगीत रमेश सार्की, मुख-सज्जा भावना भट्ट, दृष्य सेटअप दीपा भट्ट और अंजलि कुमारी ने किया। पात्रों का अभिनय दीपांशु खत्री, रोशनी ओली, प्रिंस प्रताप सिंह, हितेश भट्ट, गौरव जोशी, संदीप खत्री, सौम्या डिक्टिया, रक्षित पंत, टिंपल चंद, अंकित पंगरिया, हार्दिक ओली, प्रियांशु चंद, निमिस जोशी, कौशल पंगरिया, करन कुमार ने किया। झूलाघाट के लोगों ने कार्यशाला के आयोजन के लिए भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक रमेश चंद्र गुप्ता का आभार जताया।