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मानवाधिकार आयोग ने 15 में से 4 मामले किए निस्तारित

Wed, 18 Nov 2015 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) विजेंद्र जैन और सदस्य न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) राजेश टंडन ने आयोग के अधिकारियों की मौजूदगी में परिवादों की सुनवाई की। 15 मामलों में से 4 का मौके पर ही निस्तारण किया। उच्च हिमालयी क्षेत्र नामिक के लोगों ने मानवाधिकार आयोग के सामने आधारभूत मानव अधिकारों की बहाली करने से संबंधित प्रार्थना पत्र आयोग के अध्यक्ष को दिया। कहा है कि सड़क मार्ग से 27 किमी की दूरी पर नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में बसे नामिक गांव सड़क से वंचित है। संचार सुविधा के नाम पर अक्सर खराब रहने वाला बीएसएनएल का सेटेलाइट फोन है।
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विकास भवन में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि आयोग मानवाधिकार के प्रति संवेदनशील होकर काम कर रहा है। राज्य के तमाम स्थानों में कार्यशाला लगाकर मामलों का निस्तारण किया जा रहा है। कहा कि कार्यशालाओं से लोगों को मानवाधिकारों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। 2012 में आयोग के गठन के बाद से अब तक 3200 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। आयोग के दूरभाष नंबर 0135 2710482 के साथ चिट्ठी, ईमेल अथवा स्वयं आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) राजेश टंडन ने लोगों को मानवाधिकारों के प्रति सचेत रहने को कहा।
नामिक के महेंद्र सिंह भंडारी, प्रताप सिंह टाकुली, मोहन राम आदि ने आयोग अध्यक्ष को सौंपे प्रार्थना पत्र में कहा है कि नामिक के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। प्रभारी डीएम प्रशांत आर्य, सीडीओ विनोद गिरी गोस्वामी, आयोग के निबंधक सुनील कुमार गुप्ता, एसडीएम प्रमोद कुमार, अनुराग आर्या, डीएसपी जीएस कोहली समेत तमाम अधिकारी मौजूद थे।
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