थल-मुनस्यारी मार्ग पर हरड़िया नाले में बार-बार मलबा आने के कारण सड़क बंद होने की समस्या से मुक्ति के लिए लोक निर्माण विभाग ने वैली ब्रिज का निर्माण तो किया था, लेकिन इस पुल को भी कम खतरा नहीं है। लोग इस बात से आशंकित हैं कि पुल अगली बरसात को झेल पाएगा या नहीं।
क्योंकि पुल बनने के ठीक एक माह बाद सितंबर में हरड़िया के तेज प्रवाह ने उसे इतना बड़ा झटका दिया था कि यह अपने स्थान से दो मीटर नीचे खिसक गया था। 30 मीटर लंबे इस वैली ब्रिज के निर्माण में लोनिवि ने करीब 65 लाख रुपये खर्च किए, जिस स्थान पर पुल बनाया गया है वहां पर नाले का तल बिल्कुल करीब पड़ता है।
यदि हरड़िया नाले में मलबा और मिट्टी ज्यादा मात्रा में बहकर आने लगे तो वह पुल के ऊपर तक पहुंच जाता है। लोनिवि के अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि पुल में सुरक्षा के मानक बनाए जाने जरूरी हैं। लोनिवि के उपखंड अधिकारी शंकर जड़ौत ने पुल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि विभाग इस पुल को वर्तमान ऊंचाई से दो मीटर और ऊपर उठाने की तैयारी में है, यदि पुल दो मीटर और ऊंचा हो जाता है तो नाले के मलबे का खतरा नहीं रहेगा।
थल-मुनस्यारी मार्ग पर हरड़िया की समस्या हल करने के लिए सरकार ने वैली ब्रिज का निर्माण कर लोगों को राहत पहुंचाने का काम तो किया लेकिन इसकी सुरक्षा के लिए पूरे मापदंड नहीं अपनाए। बारिश के सीजन में हड़बड़ी में तैयार किए गए इस पुल की सुरक्षा की चिंता भी विभाग को होने लगी है। अब यदि पुल को ऊंचा उठाने का काम चलता है तो थल-मुनस्यारी मार्ग में यातायात कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ेगा।
मुनस्यारी की ज्येष्ठ प्रमुख जसौदा देवी का कहना है कि थल-मुनस्यारी मार्ग पर हरड़िया नाले में बना यह पुल इस लाइफ-लाइन का अहम पुल है। इसे मजबूती देने का काम होना चाहिए। यदि पुल की सुरक्षा के लिए अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले बरसात के सीजन में यह पुल फिर से गंभीर समस्या खड़ी कर सकता है।
कांग्रेस नेता चंद्रभान जोशी का कहना है कि हरड़िया में वैली ब्रिज के निर्माण से यातायात में बड़ी राहत मिली है। पुल में जो खामियां रह गई हैं उसे दूर करने का प्रयास होगा। हरड़िया के कैंसर से कम से कम लोगों को मुक्ति मिली है। वह कहते हैं कि इतनी बड़ी रकम से बने पुल की सुरक्षा के ठोस उपाय किए जाने जरूरी हैं।