स्मार्ट सिटी में एक व्यवस्था यह भी होती है कि नगर के अंदर सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चुस्त दुरुस्त रहें, लेकिन यहां तो सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का जिम्मा संभाले रोडवेज की हालत बेहद खराब है। रोडवेज के यहां के बस बेड़े में 63 बसें हैं, इनमें से हमेशा 15 गाड़ियां किसी न किसी कारण से खड़ी रहती हैं। पहले टायरों की कमी के कारण बसों का संचालन नहीं हुआ। अब स्पेयर पार्ट्स की कमी आड़े आ रही है। कुल बसों के बेड़े में से दस बसें ऐसी हैं जो निर्धारित माइलेज को पूरा कर चुकी हैं। उत्तराखंड परिवहन निगम के अधिकारियों के उपेक्षापूर्ण रवैये से यहां का रोडवेज डिपो बेहद खराब हालत में पहुंच गया है।
रोडवेज की बसों की आवश्यकता हाल के दिनों में ज्यादा बढ़ी है। सरकार ने मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ, बुजुर्गों और स्वाधीनता सेनानियों को बसों में मुफ्त सेवा की सुविधा दे रखी है, लेकिन जिले में रोडवेज की बसों की हालत ऐसी है कि अधिकांश लोगों को इनका लाभ नहीं मिल पाता। निजी सेक्टर की यातायात सेवाओं में मनमानी का आलम है। कोई भी निजी वाहनों के किराए का निर्धारण, गाड़ियों की फिटनेस आदि की चेकिंग नहीं करता। स्मार्ट सिटी बनने पर सबसे पहले परिवहन सेवाओं में सुधार की जरूरत पड़ेगी।
परिवहन सेवाओं में सुधार जरूरी
सिमलगैर निवासी तारा जोशी का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सुधार लाया जाना चाहिए। स्मार्ट सिटी का विचार तो अच्छा है लेकिन स्मार्ट सिटी के मानक के हिसाब से सुविधाएं भी जुटाया जाना जरूरी है। वह कहती हैं कि निजी क्षेत्र की परिवहन सेवाओं को भी वैकल्पिक तौर पर चलाया जाना चाहिए।
रोडवेज बसों पर ही निर्भरता
पूर्व फौजी वीरेंद्र सामंत का कहना है कि आम लोग रोडवेज की बसों से ही सफर करना चाहते हैं। जब रोडवेज की सेवाएं ही लचर होंगी तो लोगों को इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। वह कहते हैं कि आम जनता की सुविधा के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की परिवहन सेवाओं को सुधारने की जरूरत है।
ग्रामीण क्षेत्रों तक हो सेवा का विस्तार
व्यवसायी रोहित पांडे का कहना है कि रोडवेज बसों का संचालन ग्रामीण अंचलों तक किया जाना चाहिए। सिर्फ महानगरों तक सेवाओं के संचालन का कोई लाभ नहीं है। सरकार को चाहिए कि यहां के बस बेड़े में वाहनों की संख्या दोगुनी की जाए और हर किसी को रोडवेज की बसों में बेहतर सुविधा दी जाए।
सरकार इन मसलों पर ध्यान दे
टकाना निवासी दीप्ति बिष्ट का कहना है कि सरकार को सबसे पहले पहाड़ों में यातायात सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए। जब यातायात व्यवस्था ठीक होगी तो पर्यटन व्यवसाय भी बढ़ेगा। कम से कम प्रदेश के हर शहर तक यहां से सीधी बस सेवा होनी चाहिए। इसका फायदा सरकार को भी मिलेगा।