बैशाखी पर्व पर शुक्रवार को थल की रामगंगा में हजारों लोग स्नान के लिए पहुंचेंगे और शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे, लेकिन नदी तट पर फैली गंदगी में लोग कैसे स्नान करेंगे, यह बड़ा सवाल है। बैशाखी पर्व को देखते हुए भी नदी में सफाई के लिए कोई अभियान नहीं चला। नदी तट पर शवदाह के बाद छोड़ी गई लकड़ियों, कपड़ों के टुकड़े और गंदगी के अंबार हैं। सारी गंदगी नदी में मिलती जा रही है। कई लोग नदी के किनारे ही शौच कर देते हैं।
थल में रामगंगा की गंदगी को लेकर अमर उजाला ने कई खबरें प्रकाशित की हैं। दुर्भाग्य का विषय यह है कि अब तक किसी भी स्तर पर सफाई का अभियान नहीं चल पाया। सरकारी तंत्र ने तो जैसे नदी की तरफ आंख बंद कर दी है। व्यापारियों ने कई बार अपने स्तर से सफाई का अभियान तो चलाया, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण इसमें निरंतरता नहीं आ पाती। इस बार लोगों को उम्मीद थी कि शायद प्रशासन मेला शुरू होने से पहले सफाई अभियान चलाएगा, लेकिन प्रशासन को इसकी कोई याद ही नहीं रही।
नदी तट पर करीब 400 मीटर के दायरे में दोनों तरफ गंदगी के अंबार लगे हैं। लोगों को गंदगी से बचकर ही नदी में जाना पड़ता है। तहसीलदार रघुवीर सिंह ने स्वीकार किया कि नदी में गंदगी है, लेकिन प्रशासन के पास कोई मद न होने के कारण सफाई अभियान नहीं चलाया जा सका।
थल पहुंचते ही नदी बेहद प्रदूषित
रामगंगा हीरामणि और नामिक ग्लेशियर से निकलती है। उद्गम स्थल से काफी दूरी तक नदी में कोई प्रदूषण नहीं है, लेकिन जैसे ही थल बाजार में नदी पहुंचती है तो नजदीकी कस्बों और गांवों की गंदगी से यह बेहद प्रदूषित हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी प्रदूषण का शिकार नहीं होती तो इसका पानी बेमिसाल होता। नदी में कई गंदे नाले भी मिल जाते हैं।