शील प्रबंधन अस्पताल में चिकित्सक और स्टाफ की तैनाती के मानकों का उल्लंघन कर रहा है। अस्पताल में 12 में से नौ चिकित्सक ही तैनात हैं। सर्जन के साथ ही नेत्र रोग और बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। चिकित्सकों के न होने से मरीजों को मुख्यालय दौड़ लगानी पड़ रही है।
मुनस्यारी में 10 अप्रैल 2014 से पीपीपी मोड पर सीएचसी का संचालन हो रहा है। स्वास्थ विभाग और शील प्रबंधन के बीच हुए एमओयू के मुताबिक अस्पताल में 12 चिकित्सक और 30 पेरामडिकल नर्सिंग स्टाफ स्वीकृत है। लेकिन शील प्रबन्धन मानकों का पालन नहीं कर रहा है। अस्पताल में लंबे समय से सर्जन के साथ ही नेत्र रोग और बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली चल रहा है। इससे क्षेत्रवासियों को चिकित्सा सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को 130 किमी दूर मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे उनका ज्यादा समय और धन खर्च हो रहा है।
अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से क्षेत्रवासियों में रोष बना हुआ है। क्षेत्रवासियों ने जल्द चिकित्सकों की तैनाती न होने पर प्रबंधन का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ हेमंत मर्तोलिया का कहना है कि उच्चाधिकारियों को कई बार अव्यवस्थाओं की जानकारी दी जा चुकी है। कई माह बाद भी प्रबंधन ने चिकित्सकों की तैनाती नहीं की है।