उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने शुक्रवार को अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ताओं की मांग है कि सभी अस्पतालों में महिला और बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए। आशाओं के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी दी जाए। प्रतिवर्ष पांच हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में भुगतान किया जाए, आशाओं को राज्य कर्मचारी घोषित करने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाए, प्रशिक्षण के लिए एनजीओ की भूमिका को समाप्त किया जाए, आशाओं को बोनस की राशि भुगतान किया जाए, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के सर्वे के समय जो मेहनताना देने का वायदा किया था उसका तत्काल भुगतान किया जाए और आशाओं को बीस लाख रुपये दुर्घटना बीमा की सुविधा दी जाए।
संगठन की जिलाध्यक्ष नंदा गंडी और जिला सचिव इंद्रा देउपा ने कहा कि आशा कार्यकत्रियां हर सरकारी अभियान को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं। वह स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ के समान काम कर रही हैं लेकिन उनको सुविधा कुछ भी नहीं दी जाती। यह आशाओं की श्रम शक्ति का सरासर अपमान है। प्रदर्शन में मीरा जोशी, लीला जोशी, भागीरथी पांडे, मोहनी देवी, रीता वल्दिया, रुकमणी देवी, कमला नेगी, कमला चंद, उर्मिला खनका, माहेश्वरी पाठक, दया कार्की समेत कई कार्यकत्रियां मौजूद थी।