रंगभरनी एकादशी 26 फरवरी सोमवार को है। पंडितों के अनुसार 26 फरवरी को पूरे दिन भद्रा योग होने के कारण दोपहर 12.05 से 12.55 तक अभिजीत मुहूर्त पड़ रहा है। इसका उपयोग होली के चीर बंधन और रंग डालने के लिए किया जाए। कुछ गांवों में मुहूर्त की इस विषमता को देखते हुए रविवार शाम दशमी और एकादशी के मध्य में चीर बंधन की तैयारी की जा रही है।
ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने बताया कि होली की एकादशी के दिन अक्सर भद्रा का योग बनता रहता है, लेकिन इस बार भद्रा का योग पूरे दिन है। इस कारण दोपहर में कुछ मिनटों के लिए हो रहे अभिजीत योग का लोग चीर बंधन के लिए उपयोग कर सकते हैं। पंडित जोशी के अनुसार होली का दहन एक मार्च को शाम 7.30 बजे से 8.40 के मध्य में कर लेना चाहिए। होली के दहन के बाद अगले दिन दो मार्च को छरड़ी मनाई जाएगी।
ग्रामीण अंचलों में चीर बंधन के साथ ही होली की धूम शुरू होती है। चीर बंधन के समय शुभ मुहूर्त को इसलिए देखा जाता है, क्योंकि होली पर्व के समय पूरे गांव, समाज के कल्याण की कामना की जाती है। कई गांवों में होली की चीर का पूजन विधि विधान से होता है। इस कारण सही मुहूर्त में ही चीर बंधन किया जाता है।