इतिहासकार डा. राम सिंह
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कुमाऊं के प्रख्यात इतिहासकार और लेखक डा. राम सिंह का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे।
यायावर पंडित नैन सिंह रावत का दुर्लभ यात्रा साहित्य लिखने वाले डा. राम सिंह ने 1959 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए हिंदी विषय में गोल्ड मेडल हासिल किया था। बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय से ही उन्होंने कुमाऊं की कृषि और ग्रामोद्योगीय शब्दावली विषय पर पीएचडी की। एक वर्ष तक उन्होंने लखनऊ में अध्यापन किया। उसके बाद वह उत्तराखंड आ गए। कई कॉलेजों में हिंदी विभागाध्यक्ष पद पर काम करने के दौरान उन्होंने कालीकुमाऊं की रागभाग, सोर का इतिहास, आजाद हिंद फौज के क्रांतिवीर समेत कई किताबें लिखीं। बेहद सादगी का जीवन जीने वाले डा. राम सिंह रिटायर होने के बाद भी लेखन से जुड़े रहे।
उनके कई आलेख पहाड़ पत्रिका में प्रकाशित हुए। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे। इनमें पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेंद्र रावत, अधिवक्ता संस्था के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट, समाजसेवी जुगल किशोर पांडे आदि थे। विधायक मयूख महर, विशन सिंह चुफाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता मथुरादत्त जोशी, पत्रकार बीडी कसनियाल आदि ने उनके निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।