सिरोली गांव में कृषि से जुड़े हिलजात्रा उत्सव का समापन हो गया है। हिलजात्रा में परंपरागत रूप से महाकाली, हिरन, चीतल, बैलों की जोड़ी का मंचन किया गया। सिलगड़ी का पालाचाला छटकौ मच्छरदानी, खोल दे माता खोल भवानी धर्म किवाड़ा, द्वी ज्यूंला बाकारा द्यूंलों तेरा दरबारा गीतों के बोल पर ठुलखेल (चांचरी) का आयोजन हुआ।
बेतालेश्वर हिलजात्रा समिति सिरोली के अध्यक्ष भूपाल सिंह सिरोला के नेतृत्व में जैसे ही महाकाली का अवतार हिलजात्रा मैदान में आया, लोग रोमांचित हो उठे। इसके पश्चात जंगलों के संरक्षण का संदेश देने वाले हिरन, चीतल, कृषि से जुड़े बैलों की जोड़ी मैदान में आई। हिलजात्रा के जानकार देब सिंह सिरोला, चामू सिंह सिरोला ने बताया कि कुरीतियों के खात्मे के लिए आराध्य देवी महाकाली का अवतार आयोजन स्थल पर आता है। अच्छी फसल के लिए यह आयोजन होता है।
मुख्य अतिथि काशी सिंह ऐरी ने आयोजन की सराहना की। महाकाली की भूमिका में दिनेश प्रसाद, हिरन, चीतल की भूमिका में रवींद्र सिंह सिरोला, संजय, शिकारी की भूमिका में तेज सिंह थे। गल्या बैल की भूमिका शंकर राम ने निभाई। प्रधान मनोज सिरोला, नरेंद्र सिंह सिरोला, शिवराज भंडारी, राजेंद्र भंडारी, आनंद राम, गोविंद सिरोला, दीपक भंडारी आदि मौजूद थे। समापन पर सिरोली के बेतालेश्वर शिव मंदिर में गौरा, महेश्वर की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इलाके में ख्वांतड़ी, पाली, डुंगरी, सुरौण, कापड़ीगांव, बनीगांव, देवलथल, मातोली, चमडुंगरी, काणाधार और नेपाली बार्डर पीपली में हिलजात्रा का पर्व मनाया जाता है।