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उच्च हिमालयी क्षेत्र के नौ केंद्रों पर पोलिंग पार्टियां नहीं जाएगी

Wed, 04 Jan 2017 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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चुनाव तैयारी - फोटो : अमर उजाला
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धारचूला विधानसभा क्षेत्र में उच्च हिमालयी क्षेत्र के नौ मतदान केंद्रों को पोलिंग पार्टी नहीं भेजी जाएगी। वहां के मतदाताओं के लिए धारचूला नगर और जौलजीबी में पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। इन बूथों के अंतर्गत आने वाले गांवों के लोग इस समय माइग्रेशन पर घाटियों में आ गए हैं। प्रदेश में मतदान 15 फरवरी को होगा। तब तक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना बनी रहेगी। जिला निर्वाचन कार्यालय पहले ही ऐसे मतदान केंद्रों के लिए अलग से व्यवस्था कर लेता है। शीतकाल में मतदान होने की स्थिति में इन गांवों के लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। निर्वाचन आयोग पहले ही यह व्यवस्था लागू कर देता है।
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निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्र के नागलिंग, बालिग, चल, बोन, गो, गुंजी, कुटी, बूंदी और दांतू में मतदान पार्टियां नहीं जाएगी। यहां के लोग मतदान के लिए धारचूला नगर और जौलजीबी में बनाए जाने वाले मतदान केंद्रों में वोट डालेंगे। कुछ परिवार जो माइग्रेशन पर तराई या अन्य इलाकों में चले गए हैं वह मतदान के लिए अपने मतदान केंद्र धारचूला या जौलजीबी पहुंचेंगे। उससे आगे के इलाके में हिमपात के कारण जा पाना संभव नहीं रहता। यदि चुनाव गर्मी के मौसम में होता तो उस समय मतदान केंद्र इन गांवों में ही बनाया जाता। मई 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के समय मतदान केंद्र शिफ्ट करने की जरूरत नहीं पड़ी थी।

नामिक के लिए अलग से व्यवस्था नहीं
2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नामिक मतदान केंद्र को शिफ्ट नहीं किया जाता। इस गांव के लोग शीतकालीन माइग्रेशन पर नहीं जाते। नामिक में मतदान केंद्र बनेगा और 15 फरवरी को लोग गांव के ही मतदान केंद्र में वोट डालेंगे। नामिक को सबसे हाई रिस्क पोलिंग स्टेशन की श्रेणी में रखा गया है। नामिक से द्वालीगाड़ आने वाले पैदल रास्ते पर जाड़ों के मौसम में भारी हिमपात हो जाता है। ऐसे में पोलिंग पार्टी को बागेश्वर के सामा होते हुए भेजने की व्यवस्था की जाती है। यदि मौसम ज्यादा खराब होता है तो पोलिंग पार्टी को हेलीकॉप्टर से भेजने का भी फैसला लिया जा सकता है।
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खतरनाक सड़क से पोलिंग पार्टियां कैसे जाएंगी
बलुवाकोट से पय्यांपौड़ी तक दस किलोमीटर लंबी सड़क का चार किलोमीटर हिस्सा इतना खतरनाक है कि इसमें वाहनों के आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। सबसे बड़ी समस्या पोलिंग पार्टियों के आने-जाने में हो सकती है। इस सड़क पर डामर बिछाने का ठेका एक वर्ष पहले हो गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। पय्यांपौड़ी के प्रधान बंशी राम ने बुधवार को इस सड़क की जर्जर हालत की जानकारी जिलाधिकारी को दी। प्रधान ने बताया कि सड़क का चार किलोमीटर हिस्सा इतना खतरनाक है कि उसमें वाहन चलाने में ड्राइवर डरते हैं। पय्यां से जीआईसी तक दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण का ठेका भी दिया गया है, लेकिन इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। प्रधान ने बताया कि सड़क के चौड़ीकरण का काम एक वर्ष से चल रहा है, लेकिन अब तक 100 मीटर सड़क भी चौड़ी नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग भारी परेशानी के बीच इस सड़क से आवाजाही कर रहे हैं।
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