पिथौरागढ़। जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान की ओर से बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसमें औषधीय प्रजातियों की खेती एवं विपणन की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. बीपी भट्ट ने जिले के धारचूला और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्र में उगने वाली जड़ी बूटियों की जानकारी दी।
बताया कि अधिक दोहन के कारण कई बहुमूल्य जड़ी बूटियां अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। इनके संरक्षण के लिए जड़ी बूटी की खेती की जानी चाहिए।
डॉ. भट्ट ने बताया कि अतीस, कूठ, कुटकी, जम्बू, गंद्रायण, डोलू, अमेश, चूक, बालछड़, हत्थाजड़ी, जटामासी एवं वनककड़ी औषधीय प्रजातियां हैं।
बताया कि संस्थान राज्य के विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में इनकी खेती के लिए 38 प्रजातियों को प्रोत्साहित कर रहा है। पांच नाली तक की जमीन में खेती के लिए 26 प्रजातियों के बीज निशुल्क देय हैं।
बताया कि राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ओर से समूह आधारित खेती के लिए 30 से 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी और उद्यान अधिकारी आरएस वर्मा ने भी विभागीय योजनाएं बताईं।
भेषज संघ के समन्वयक नरेंद्र प्रकाश पांडे ने जड़ी बूटी की खेती, पंजीकरण और निकासी की जानकारी दी। डाबर कंपनी के प्रतिनिधि सुरेश राम ने तिमूर, कपूरकचरी, कुटकी, कूठ आदि प्रजातियों की मांग बताई।
लीड बैंक अधिकारी अमर सिंह ग्वाल, दुर्गेश जंगपांगी, वैद्य लीलाधर जोशी, भुवन चंद्र पुजारी सहित संस्थान के मोहन चंद्र जोशी, दीपक चंद्र पचौली, प्रकाश राम, मदन पंत, गणेश राम आदि रहे।