कैलाश मानसरोवर यात्रा पैदल मार्ग पर लखनपुर से नजंग तक 6 किमी हिस्सा बुरी तरह टूट गया है। सीमा सड़क संगठन की ओर से सड़क निर्माण के दौरान भूस्खलन होने से यह स्थिति आई है। ऐसे में इस बार कैलाश यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर ही एकमात्र विकल्प बच गया है। गर्मियों में वापस गांवों की ओर जाने वाले सीमांत के लोगों को भी नेपाल से होते हुए निकलना पड़ेगा।
कैलाश यात्रा मार्ग की इस स्थिति पर मंथन के लिए एसडीएम एसके पांडे ने सीमा सड़क संगठन के कमांडिंग अफसर, विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बृहस्पतिवार को बैठक की। सीमा सड़क संगठन के कमांडिंग अफसर मेजर रोहित ने बताया कि लखनपुर के पास हुए भूस्खलन के कारण सड़क निर्माण कार्य में रुकावट आई है। चार अप्रैल तक नजंगगाड़ तक सड़क पहुंचाने के लक्ष्य को धक्का लगा है।
हालांकि संपर्क मार्ग बनाने का कार्य जारी है। क्षेत्रवासी जानमाल की सुरक्षा के लिए जून तक लखनपुर से नजंग तक के पैदल मार्ग का उपयोग नहीं करेंगे, तो बेहतर होगा। एसडीएम ने बताया कि लखनपुर से नजंग के बीच अप्रैल तक संपर्क मार्ग घोड़े, खच्चरों लायक बन पाना संभव नहीं है। ऐसे में अप्रैल में उन ग्रामीणों को जो जाड़ों में नीचे उतर आते हैं, गांव वापस जाने में दिक्कतें होंगी। जून से होने वाले भारत-चीन व्यापार भी प्रभावित होगा। ये लोग नेपाल के रास्ते नजंग तक पहुंचाए जा सकते हैं। इसके लिए डीएम सी रविशंकर ने नेपाल के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया है।
बैठक में तय हुआ कि लखनपुर और नजंग के बीच दो पुल लोक निर्माण विभाग बनाएगा। जीएंडजी कंपनी भी इसमें सहयोग करेगी। रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल ने बताया कि संस्था नेपाल के प्रतिनिधियों एवं प्रशासन से सहयोग के लिए अनुरोध करेगी। बैैठक में लोक निर्माण विभाग, आर्मी, गर्ग एंड गर्ग कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ ही रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, महासचिव देवकृष्ण फकलियाल, भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय गर्ब्याल, प्रधान गुलाब सिंह, अर्चना देवी, लक्ष्मी रायपा, पुष्पा देवी, उप प्रधान गोपाल सिंह आदि उपस्थित थे।