पिथौरागढ़ नगर में नालियों से गुजरती पेयजल लाइनें
- फोटो : अमर उजाला
आंवलाघाट योजना बनने के बाद नगर में पेयजल की किल्लत से निजात की उम्मीद जगी है, लेकिन दशकों पुरानी लाइनों पर बड़ी आबादी के बोझ से आपूर्ति सुचारु करना बड़ी चुनौती है। दशकों पहले बनाई गई यह लाइनें बसासत बढ़ने के साथ नाकाफी साबित हुई हैं। नगर की पेयजल लाइनेें अपनी क्षमता से दोगुना भार ढो रही हैं। इनकी कम क्षमता और क्षतिग्रस्त होने से नगरवासियों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ में वर्ष 1974 के आसपास घाट पंपिंग योजना के तहत पेयजल लाइनें बिछाई गई थी। यह लाइनें उस समय 20 हजार की आबादी की जरूरत के लिहाज से बिछाई गई थी। इन लाइनों को बिछे हुए 50 साल से अधिक समय हो गया है। गुजरे सालों में बसासत बढ़ने से लाइनों पर बड़ी आबादी का बोझ बढ़ा है। कम क्षमता की लाइनों से बड़ी आबादी को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सालों पुरानी यह पेयजल लाइनें जगह-जगह जीर्ण-शीर्ण और क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इससे पेयजल योजना के टेल पर बसे क्षेत्रों में पानी की समस्या गहराई रहती है।
दूसरी ओर ठुलीगाड़ योजना के तहत बिछाई गई लाइनों को भी 20 साल से अधिक का समय हो गया है। इस बीच नगर की आबादी बढ़कर वर्तमान में एक लाख तक पहुंच गई है, लेकिन बसासत बढ़ने के बाद भी लाइनों के विस्तारीकरण और मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया गया। नगर में लाइनों के पुनर्गठन की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है। इधर, नगर में पेयजल आपूर्ति के लिए 12 एमएलडी क्षमता वाली नवनिर्मित आंवलाघाट योजना अस्तित्व में आ गई है, लेकिन पेयजल लाइनों की बदहाली के चलते आने वाले दिनों में आंवलाघाट से भरपूर पानी मिलने के बाद भी नगर में मांग के मुताबिक आपूर्ति करना जल संस्थान के लिए चुनौती बना है।
नालियों से गुजर रही पेयजल लाइनें
नगर में लाइनों के पुनर्गठन की योजना तो दूर नालियों से गुजर रही पेयजल लाइनों को हटाने की योजना भी मूर्त रूप नहीं ले पाई है। नगर में पेयजल लाइनें जगह-जगह नालियों के बीच से गुजर रही हैं। लाइनों के पुराना होने और क्षतिग्रस्त होने से गंदे पानी की आपूर्ति की आशंका बनी रहती है। क्षेत्रवासी लंबे समय से नालियों से लाइनों को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जल संस्थान नालियों से गुजर रही लाइनों को हटाने के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
पुरानी लाइनों को देखते हुए पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। समस्याग्रस्त क्षेत्रों में अधिक क्षमता वाली लाइनें बिछाई जाएंगी। नालियों से गुजर रही पेयजल लाइनों को जल्द हटाया जाएगा।
-विशाल कुमार, ईई, जल संस्थान, पिथौरागढ़