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Pithoragarh News: शहर के अस्पतालों में इलाज के लिए भटक रहे हृदय रोगी

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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने से हृदय रोगियों को इलाज के लिए शहर के अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है। एक दशक पहले तक यहां हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. एचसी पाठक हृदय रोगियों का इलाज करते थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद हार्ट की जांच के लिए मरीजों को हल्द्वानी, बरेली या दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। कई मामलों में समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीज दम तोड़ देते हैं।
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सीमांत जिले में हार्ट पेशेंट लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 2019 में आईपीएचएस मानकों में बदलाव के चलते कार्डियोलॉजिस्ट के पद को खत्म कर दिया है। इससे पांच लाख की आबादी वाले सीमांत जिले में दिल के डॉक्टर की तैनाती हो पाना पूरी तरह बंद हो गया है। यहां जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत था। डॉक्टर के रिटायर होने के बाद से इस पद पर तैनाती नहीं हो सकी।
सीमांत में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जिला मुख्यालय में बेस अस्पताल खोला जा रहा है, लेकिन यहां भी कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं हैं। ऐसे में पिथौरागढ़ जिले में लोगों को हृदय रोक का इलाज मिल पाना संभव नहीं होगा।
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कोट

जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत था। 2015 के बाद कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती हुई। 2019 में आईपीएचएस के मानकों के अनुसार जिला अस्पताल में स्वीकृत कार्डियोलॉजिस्ट का पद समाप्त हो गया है। नए पद सृजित होने के बाद ही दिल के डॉक्टर की तैनाती संभव है। - डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
कोट


बेस अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं है। भविष्य में पद सृजित होने की संभावना है। पद स्वीकृत होने के बाद ही कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती हो सकेगी। -डॉ. अजय आर्या, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़
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