पिथौरागढ़। बलुवाकोट क्षेत्र में करीब 15 हजार से अधिक की आबादी के लिए चिकित्सा सुविधा के नाम पर एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल है। क्षेत्र के लोगों को धारचूला या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। क्षेत्रवासियों ने बलुवाकोट में ऐलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगी बलुवाकोट ग्राम पंचायत के आसपास पय्यापौड़ी, ढूंगातोली, छारछुम, पंथा गांव, नकतड़, लेख, गुठानी, फुलहनियां, गागरागांव, पोखरी, पातल, कंपास, टाड़ा, जोशी गांव और बोरा गांव हैं। इन गांवों के लोगों को पांच से 12 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना होता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवतियों को उठानी पड़ती है। उन्हें प्रसव पीड़ा होने पर डोली के सहारे अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर यहां आयुर्वेदिक अस्पताल है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को छोटी-छोटी जांच के लिए भी धारचूला या पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ती है।क्षेत्रवासियों ने बलुवाकोट में ऐलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग की है।
स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हैं। शासन में बैठे लोगों को सीमांत के लोगों की चिंता नहीं है। अगर चिकित्सा सुविधा बलुवाकोट में मिल जाए तो लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
जीवन ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य पय्यापौड़ी
कई गांवों में सड़क नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों को पैदल ही सड़क तक आना पड़ता है। इसके बाद धारचूला या पिथौरागढ़ जाना उनकी मजबूरी है। पार्वती बिष्ट, ग्रामीण बलुवाकोट।
शासन-प्रशासन और विभाग से अस्पताल खोलने की मांग की जा रही है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इस मांग को लेकर एक शिष्टमंडल डीएम और सीएमओ से मिलेगा।
पूरन ग्वाल, ग्राम प्रधान बलुवाकोट।