अस्कोट का अस्पताल जहां वर्षों से डाक्टर नहीं
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विधानसभा चुनाव के समय मुख्य रूप से स्थानीय समस्याओं और मुद्दों को ही केंद्र में रखा जाता है। कई बार इन मुद्दों को लेकर चुनाव की फिजां बदली गई, लेकिन यह जानकर आश्चर्य होता है कि स्वास्थ्य जैसा अहम मुद्दा किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडे में शामिल ही नहीं है। जिले के ग्रामीण अंचलों के अस्पताल बिना डॉक्टरों के हैं। यदि कहीं पर डॉक्टर हैं भी तो संसाधनों का अभाव है। गांवों से 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर जिला अस्पताल पहुंचने वाले गंभीर रोगियों को जिले से बाहर के अस्पतालों में रेफर करने की मजबूरी समाप्त नहीं हो पाई है।
जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तक डॉक्टर नहीं हैं। अस्कोट को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है। वहां पिछले चार साल से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। ग्रामीण अंचलों में दवाओं, डॉक्टरों की कमी अक्सर बनी रहती है। राज्य गठन के 16 वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की हालत सुधरने के बजाए और ज्यादा बिगड़ी है। चुनाव के समय लोगों को यह उम्मीद रहती है कि शायद इस बार समस्या हल हो जाएगी, लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के लिए एक-दूसरे को कोसने के अलावा कुछ नहीं होता। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इतने दूर के जिले में काम करने के लिए कोई डॉक्टर आना नहीं चाहता। यदि किसी की तैनाती हो भी गई तो वह जुगाड़ लगाकर यहां से खिसकने की ही तैयारी में रहता है।
जिले में कार्यरत डॉक्टरों की स्थिति
पद का नाम सृजित पद कार्यरत रिक्त
एएमओ 4 1 3
अधीक्षक 5 1 4
एमबीबीएस 82 28 54
विशेषज्ञ 55 18 37
महिला डॉक्टर 23 10 13
डेंटल सर्जन 5 3 2
क्षय रोग डॉक्टर 1 - 1
सीनियर डॉक्टर 1 - 1
स्त्री रोग विशेषज्ञ 2 1 1
हर महीने रिपोर्ट जाती है
हर जिले से स्वास्थ्य महानिदेशालय को डॉक्टरों के रिक्त पदों की सूची हर महीने भेजी जाती है। ऐसा करना अनिवार्य होता है, लेकिन महानिदेशालय के स्तर से सिर्फ सूची को देखा जाता है और कार्रवाई कुछ नहीं की जाती है। यह सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है। सीएमओ डा. यूएस अधिकारी ने बताया कि रिक्त पदों की जानकारी शासन के पास रहती है।