आशा वर्कर्स यूनियन के सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधि
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आशा हेल्थ वर्कर यूनियन के जिला स्तरीय सम्मेलन में पहुंचे प्रांतीय पदाधिकारियों ने कहा कि आशाओं को अपने हक की प्राप्ति के लिए संघर्ष जारी रखना होगा। सम्मेलन में वक्ताओं ने सरकार की नीतियों की जमकर खिलाफत की। कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों और हरीश रावत सरकार माफिया के हितों में लगी है। इस बात पर जोर दिया गया कि देश के कामगार संगठनों को सरकार की नीतियों का विरोध करना होगा।
सम्मेलन में यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि संघर्ष और एकता के बल पर अब तक आशाओं ने कुछ जीत हासिल कर ली है। सरकार अब आशाओं को हेल्थ वर्कर मानने लगी है। इसी तरह दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय बढ़ाया गया है। अब भी कई मुद्दे हैं, जिनको पूरा करने के लिए संघर्ष करना होगा। प्रदेश महामंत्री कैलाश पांडे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों को बढ़ावा दे रही है। भाकपा माले के जिला सचिव गोविंद कफलिया ने कहा कि राज्य की हरीश रावत सरकार खनन, शराब, जमीन माफिया के हितों को पूरा करने में व्यस्त है।
आशा यूनियन की जिलाध्यक्ष इंद्रा देउपा ने कहा कि आशाओं के काम को सरकार का कोई भी नुमाइंदा नजरअंदाज नहीं कर सकता। बाद में जिला कार्यकारिणी का पुनर्गठन करते हुए इंद्रा देउपा को फिर से अध्यक्ष, निर्मला पाल को महामंत्री, माहेश्वरी पाठक को उपाध्यक्ष, उर्मिला सौन को कोषाध्यक्ष चुना गया। सम्मेलन में पूरे जिले की आशा वर्कर मौजूद थीं।