जिला मुख्यालय सदर की रामलीला में लंका दहन और विभीषण के श्रीराम की शरण में जाने तक की लीला दिखाई गई। मुख्य अतिथि मनोज कुमार, जोशी, विशिष्ट अतिथि राजेंद्र सिंह रावत थे। टकाना में भी लंका दहन का मंचन किया गया।
गंगोलीहाट। यहां राजा दशरथ राम को 14 वर्ष का वनवास दे देते हैं। राम-सीता और राम-लक्ष्मण के बीच संवाद होता है। लक्ष्मण वन जाने का विरोध करने की बात जाहिर करते हैं। भगवान राम उन्हें समझाते हैं।
अस्कोट। अस्कोट की रामलीला में ताड़का, सुबाहु वध, सीता पुष्प वाटिका तक की लीला दिखाई गई। मुख्य अतिथि आईटीआई को फोरमैन आरसी पाल, विशिष्ट अतिथि डॉ. भगवती राघव थे। बैड़ा की रामलीला में सूर्पणखा के नाक, कान काटे गए। मुख्य अतिथि सांवलीसेरा की प्रधान देवकी देवी थीं।
कनालीछीना। कनालीछीना की रामलीला में धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद दिखाया गया। मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख प्रशांत भंडारी ने रामलीला कमेटी को कुर्सी और जनरेटर के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। कमेटी के अध्यक्ष मनोहर बिष्ट, सचिव कमान अन्ना ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
थल। शबरी आश्रम से बाली वध, हनुमान के लंका में पहुंचने की लीला दिखाई गई। मुख्य अतिथि पर्वतीय महापरिषद लखनऊ के महासचिव गणेश दत्त जोशी ने रामलीला कमेटी को 11 हजार रुपये भेंट किए। विशिष्ट अतिथि बिजली विभाग के अवर अभियंता मुकेश कुमार थे। कमेटी अध्यक्ष देवराज सत्याल ने दोनों अतिथियों का शाल ओढ़कर सम्मान किया। मुख्य अतिथि ने बताया कि 45 साल बाद वह थल की रामलीला देखने पहुंचे हैं। इस दौरान लोक गायक प्रहलाद महरा, सलीम अहमद, प्रताप सिंह पंचपाल, दान सिंह बिष्ट, राम सिंह जंगपांगी, नरेंद्र रौतेला, भुवन चंद्र, सुरेश जोशी आदि थे।
डीडीहाट। यहां लंका दहन तक की लीला दिखाई गई। रामेश्वर की स्थापना, विभीषण के श्रीराम की शरण में जाने के बाद अंगद-रावण संवाद तक की लीला हुई। मुख्य अतिथि पर्वतीय महापरिषद लखनऊ के महासचिव गणेश दत्त जोशी, सातवीं वाहिनी आईटीबीपी के कमांडेंट महेंद्र प्रताप थे।
बेड़ीनाग। यहां शबरी आश्रम से बाली वध, लंका दहन तक की लीला दिखाई गई। बाली-सुग्रीव युद्ध को लोगों ने खूब सराहा।