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उच्च हिमालयी क्षेत्र में फायरिंग का अभ्यास जरूरी : रावत

Thu, 18 Oct 2018 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
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मुनस्यारी में प्रशासन के साथ बैठक लेते एयर मार्शल - फोटो : अमर उजाला
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एयर मार्शल देवेंद्र सिंह रावत (एवीएसएम-वीएसएम) ने कहा कि पाकिस्तान और चीन की सीमा पर लगातार बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर उच्च हिमालयी क्षेत्र में एयरफोर्स के लिए फायरिंग का अभ्यास जरूरी है जो 12,500 फीट की ऊंचाई पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए खलियाटॉप उपयुक्त है। 

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बृहस्पतिवार सुबह करीब 9.30 बजे एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से मुनस्यारी पहुंचे एयर मार्शल ने आईटीबीपी के गेस्ट हाउस में होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर्स, वाइल्ड लाइफ, बर्ड वॉचर्स, मल्ला जोहार विकास समिति, माटी संगठन, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ तीन घंटे तक बातचीत की। एयर मार्शल रावत ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के साथ रोज बॉर्डर पर कुछ न कुछ हो रहा है। चीन इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हमसे आगे है और पर्वतीय क्षेत्रों से लगे दर्रों तक उसने सड़क बना ली है, इस लिहाज से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरफोर्स को उच्च हिमालयी क्षेत्र में फायरिंग का अभ्यास करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खलियाटॉप इसके लिए उपयुक्त है। उन्होंने इसके लिए क्षेत्रीय जनता से सहयोग मांगा। 

उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान उच्च तीव्रता के बम नहीं गिराए जाते हैं, बल्कि तीन किलो के प्रैक्टिस बम गिराए जाते हैं। इनकी ध्वनि पटाखों की आवाज के समान होती है। इससे लगभग पांच सेकेंड तक धुआं दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया कि पर्यावरण और जीव-जंतुओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि एयरफोर्स का यह अभ्यास साल में मात्र दो सप्ताह अक्तूबर या नवंबर में चलेगा।
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एसडीएम ने दी पर्यावरणीय पहलुओं की जानकारी
मुनस्यारी। एसडीएम केएन गोस्वामी ने  एयर मार्शल देवेंद्र सिंह रावत को क्षेत्र के पर्यावरणीय पहलुओं की जानकारी दी। एयर मार्शल ने देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरफोर्स और लोगों के तथ्यों का समावेश करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजने को कहा। इस दौरान विंग कमांडर एम आशु दानी, विंग कमांडर एयर फोर्स बरेली एमके प्रसाद, मल्लिका विर्दी, राम नारायण, श्रीराम धर्मशक्तू, वन रेंजर पूरन देऊपा, भूगर्व वैज्ञानिक प्रदीप कुमार, पूरन पांडे, प्रमोद कुमार, सुरेंद्र पंवार, बृजेश धर्मशक्तू, देवेंद्र देवा, कमल उपाध्याय, गोकर्ण मर्तोलिया, लोक बहादुर जंगपांगी आदि मौजूद थे। तीन घंटे तक स्थानीय लोगों के बीच रहे एयर मार्शल दिल्ली लौट गए।

स्थानीय लोगों ने सामने रखे तथ्य
मुनस्यारी। स्थानीय लोगों ने कहा कि खलियाटॉप मुनस्यारी का मुख्य पर्यटक स्थल होने के साथ ही लगभग 20 दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों वाला वन क्षेत्र है। पूरे क्षेत्र के लगभग 41 गांवों के तीन हजार से ज्यादा लोगों की आजीविका भी इसी खलिया बुग्याल पर निर्भर है। खलियाटॉप से इतर अन्य किसी क्षेत्र में फायरिंग रेंज बनाया जाए, ताकि स्थानीय लोगों के हक-हकूक, व्यवसाय, पर्यावरण, वन, जीवजंतु पर कोई प्रभाव न पड़े।

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