विधायक हरीश धामी से मिलते तल्लाजोहार के मायूस किसान
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ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों में मायूसी का आलम है। लगातार चार बार ओलों की मार से गेहूं और मसूर की फसल इस कदर चौपट हो गई है कि किसानों को अगली बार बीज की व्यवस्था करने की चिंता सताने लगी है। तल्लाजोहार के सैणरांथी और होकरा गांव में जब मंगलवार को विधायक हरीश धामी पहुंचे तो किसान खेतों में गिरे हुए गेहूं के दानों को लेकर पहुंच गए। तल्लाजोहार घाटी में गेहूं और मसूर का अच्छा खासा उत्पादन होता है। हर परिवार सालभर का अनाज खेतों से ही जुटा लेता है। बड़ी जोत वाले कुछ किसान अनाज की बिक्री भी करते हैं, लेकिन इस बार लोगों के पास बीज के लिए भी अनाज नहीं बचा है।
विधायक धामी से लोगों ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन में कटौती कर दी है। अब सरकारी सस्ते-गल्ले की दुकानों से राशन नहीं मिलता। लोग फसल से गुजारा करने की उम्मीद में थे तो मौसम ने उस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है। दोनों गांवों में बारिश और ओलावृष्टि से पैदल रास्ते, पेयजल योजनाएं टूट गई हैं। लोगों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है। पेयजल योजना टूटने से गर्मी के मौसम में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
विधायक ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में वह ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। साथ ही किसानों को मुआवजा दिलाने, लोन माफ करने का भी सरकार से आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं और रास्तों की मरम्मत के लिए शीघ्र धन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी मानसून सीजन शुरू नहीं हुआ है, लेकिन लोगों ने आपदा जैसी स्थिति का सामना कर लिया है। किसानों ने कहा कि यदि सरकार राहत राशि नहीं देती तो इस बार गरीब परिवारों के सामने गंभीर संकट की स्थिति खड़ी हो जाएगी।
फसलों के नुकसान का मुआवजा मांगा
पिथौरागढ़। मझेड़ा (बीसाबजेड़) के किसानों ने प्रशासन से ओलावृष्टि से हुए फसलों के नुकसान का मुआवजा मांगा है। मझेड़ा के किसानों ने जिलाधिकारी सी रविशंकर को दिए ज्ञापन में कहा है कि 21 अप्रैल को हुई ओलावृष्टि से गेहूं की फसल के साथ ही सब्जी को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के पास गेहूं का बीज तक नहीं बचा है। इन लोगों ने कहा कि पिछले साल भी ओलावृष्टि से फसलों का भारी नुकसान हुआ था। पिछले साल हुए फसलों के नुकसान का भी मुआवजा किसानों को नहीं मिला। ज्ञापन में प्रेम चंद्र कापड़ी, तुलसी दत्त कापड़ी, बहादुर चंद, गणेश चंद, महेश चंद, जय चंद, भवानी राम आदि के हस्ताक्षर हैं।