पिथौरागढ़ में गुंजी से पहुंचे पांचवें दल के यात्री
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मौसम खुलते ही मंगलवार को वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने आठवें दल के कैलाश यात्रियों को लेकर गुंजी के लिए उड़ान भरी। छियालेख पार जैसे ही गुंजी में पांचवें और छठे दल के यात्रियों ने हेलीकॉप्टर देखा तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। पांचवें और छठे दल के 113 यात्रियों को गुंजी से आठ फेरों में पिथौरागढ़ लाया गया। वहीं, सातवें दल के यात्री कुग्गु पहुंच गए है। यात्रियों ने कैलाश की परिक्रमा शुरू कर दी है।
मंगलवार सुबह 8.38 बजे वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने यात्रियों को लेकर उड़ान भरी। हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेकर 9.10 बजे गुंजी पहुंचा। इसके बाद गुंजी में फंसे पांचवें और छठे दल के यात्रियों को लेकर पिथौरागढ़ रवाना हुआ। फिर नैनीसैनी से दो और हेलीकॉप्टर गुंजी के लिए उड़े। दोपहर 1.17 बजे आखिरी फेरे में हेलीकॉप्टर गुंजी पहुंचा और यात्रियों को लेकर गुंजी में छोड़कर वहां फंसे सभी यात्रियों को लेकर पिथौरागढ़ रवाना हो गया। पिथौरागढ़ पहुंचे यात्रियों ने बताया कि गुंजी में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
राजस्थान जोधपुर के राजू व्यास, लक्ष्मीनारायण, सीमा व्यास, चंद्रा ने बताया कि वह लोग नौ दिनों से गुंजी में फंसे थे। चौथी बार यात्रा पर गई चंद्रा ने बताया कि इस बार उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनका अवकाश मंगलवार को समाप्त हो गया है। यात्रियों ने बताया कि पूर्व में जब वह यात्रा पर गए तो तब भी लगातार बारिश थी, लेकिन इसी बार वह गुंजी में फंसे। इससे यात्रा का पूरा उत्साह समाप्त हो गया। रैणधाम नागौर के राम मनोहर दास ने बताया कि मंगलवार को भी गुंजी में बादल थे। इसके बाद भी हेलीकॉप्टर वहां उतरा और वह भोलेनाथ की कृपा से सकुशल पिथौरागढ़ पहुंच गए हैं। यात्रियों ने केएमवीएन, आईटीबीपी और चीनी सुरक्षा एजेंसियों की सराहना की। बावजूद इसके यात्रा में आई दिक्कतों को लेकर वह काफी व्यथित थे।
पैदल मार्ग सही होता तो नहीं होती दिक्कत
पिथौरागढ़। गुंजी से पिथौरागढ़ पहुंचे पांचवें दल में शामिल राजस्थान की चंद्रा और सीमा व्यास ने कहा कि यदि प्रशासन यात्रा की तैयारी समय रहते करता और पैदल रास्ते ठीक होते तो उन्हें दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर के भरोसे ही यात्रा नहीं कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पांचवें और छठे दल के यात्री गुंजी में फंसे थे। यात्रियों के बीच अच्छा तालमेल था। सभी एक-दूसरे का ध्यान रख रहे थे।
बाबा कैलाश नाथ ने नंगे पांव यात्रा की
पिथौरागढ़। श्री गंगानगर राजस्थान के बाबा कैलाशनाथ सातवीं बार कैलाश दर्शन कर लौटे। बाबा ने एकमात्र लगौंट पहने थी। उन्होंने नंगे बदन और नंगे पांव यात्रा की। उन्होंने कहा कि सब भोलेनाथ की कृपा है। उन्होंने कहा कि यदि वापसी में यात्रियों को गुंजी के बजाय बूंदी में रखा जाता और छोटे हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था होती तो यात्रा का आनंद ही कुछ और होता। बाबा के भक्त गंगानगर से उन्हें लेने पिथौरागढ़ पहुंचे थे।