इस तरह के लकड़ी के लट्ठों से हो रही है आवाजाही
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महाकाली नदी के किनारे तड़ीगांव से कोठेरा को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग पांच साल से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत करने पर भी किसी विभाग ने रास्ते को बनाने में रुचि नहीं दिखाई। रास्ता टूटने से एसएसबी को सीमा पर पेट्रोलिंग करने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने दो लकड़ियां डालकर अस्थायी रास्ता बना रखा है। इससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
मूनाकोट विकासखंड के नेपाल सीमा से लगे कोठेरा गांव को जोड़ने वाला पैदल मार्ग 2013 की आपदा में महाकाली नदी के उफान से ध्वस्त हो गया था। 26 फरवरी को तड़ीगांव के भूपेंद्र चंद ने जनता दरबार में रास्ते की दुर्दशा को डीएम के सम्मुख रखा था। इसके बाद एसडीएम एसके पांडे ने जिला विकास अधिकारी को शीघ्र रास्ता बनाने के निर्देश दिए थे। विभाग ने दो सौ मीटर टूटे रास्ते पर नदी के ऊपर दो मीटर ऊंचा रास्ता बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। यह प्रस्ताव अब तक फाइलों में ही दबा है। ग्रामीण आज भी उसी टूटे रास्ते से चलने को मजबूर है, इस कारण कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।
ग्रामसभा को अपनी निधि से रास्ता बनाने के लिए कहा गया है। बजट अधिक होने से आपदा में भी पैसा नहीं आ पा रहा है। मनरेगा के तहत ब्लॉक को रास्ता बनाने के लिए कहा गया है।
-गोपाल गिरी, जिला विकास अधिकारी, पिथौरागढ़।