झूलाघाट (पिथौरागढ़)। सीमू गांव के एक किशोर के मुंडन संस्कार में शामिल होने गईं सीमू गांव की दादी और पोती रविवार को महाकाली नदी में बह गईं। सूचना के बाद झूलाघाट थाने से पुलिस टीम और जिला मुख्यालय से एसडीआरएफ की टीमें मौके के लिए रवाना हो गईं हैं। खबर लिखी जाने तक दोनों का पता नहीं चल पाया था।
सीमू गांव के अरुण चंद का रविवार को महाकाली के किनारे स्थित लाटालिंग मंदिर में मुंडन संस्कार किया गया। गांव के सुरेश रावत की बेटी लतिका (8) और मां तारा देवी (55) भी निमंत्रण पर इस आयोजन में शामिल होने गईं थीं। मुंडन संस्कार संपन्न होने के बाद दोपहर 12 बजे लतिका पानी पीने के लिए महाकाली नदी के किनारे गई और पैर फिसलने से बह गई। यह देख दादी तारा देवी (55) उसे बचाने के लिए नदी में कूद गई और वह भी बह गई। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चल पाया।
सूचना पर झूलाघाट थाने के एसआई चंद्र सिंह मेवाड़ी के नेतृत्व में पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और दोनों की ढूंढ खोज शुरू की। थाना प्रभारी टीएस राणा ने एसपी को सूचना दी। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को मौके पर भेजा गया है।
मजदूरी कर गुजारा करता है सुरेश का परिवार
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। सुरेश रावत मजदूरी कर परिवार पालता है। उसके दो बच्चे थे। काली नदी में डूबी लतिका प्राइमरी स्कूल कानड़ी में कक्षा तीन की छात्रा थी, जबकि बेटा जीआईसी झूलाघाट में आठवीं में पढ़ता है। हादसे के बाद लतिका की मां रेनू रावत का बुरा हाल है, वहीं परिवार में मातम पसरा है। (संवाद)
कई लोगों की मौत के बाद भी नहीं लगे चेतावनी बोर्ड
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पिछले तीन साल में महाकाली नदी में कई लोग डूब चुके हैं। इसके बाद भी नदी किनारे चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। कुछ माह पहले बनाड़ा गांव की एक लड़की भी नदी में डूब गई थी, जिसे पुलिस और स्थानीय लोगों ने बचा लिया था। पहले भी नदी के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने की बात स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने रखी थी लेकिन बोर्ड नहीं लगाए गए। (संवाद)
पोती लतिका(फाइल)- फोटो : PITHORAGARH