बेटे के विवाह की तैयारी में लगे लीलाधर के घर पर मदद के तौर पहुंची गडेरी
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गांवों में अभी सहयोग की भावना समाप्त नहीं हुई है। यदि किसी घर में शादी, विवाह जैसा बड़ा आयोजन हो जाए तो लोग सामूहिक रूप से मदद को तैयार रहते हैं लेकिन अब रुपए की भारी कमी हो गई तो लोग जिन घरों में विवाह के कार्यक्रम होने हैं उनको गांव के लोग गडेरी, मसूर, उड़द जैसी सामग्री देकर जा रहे हैं, ताकि बाजार से कम से कम सब्जी, दाल न खरीदने पड़े।
इस तहसील के दूरस्थ पाराकोट गांव के लीलाधर उप्रेती के छोटे बेटे विनोद की शादी 21 नवंबर को होगी। बारात पिथौरागढ़ जाने वाली है। लीलाधर ने बताया कि आठ नवंबर की रात नोटबंदी से पहले वह विवाह के लिए बैंक से रुपए निकाल लाए थे। 500 और 1000 के नोट बंद होने से वह उनको बैंक में जमा करा आए। अब उनके पास विवाह के लिए रुपए नहीं हैं।
100 और 50 के जो नोट उनके पास हैं, उनको कर्मकांड के लिए बचाकर रखा है। मित्रों और रिश्तेदारों में किसी के पास ऐसी स्थिति नहीं है कि वह मदद कर पाएं। उन्होंने कहा कि अब बारातियों की संख्या कम कर रहे हैं। बाराती कम होंगे तो गाड़ियां कम ले जानी पड़ेंगी। सब्जी, दाल में स्थानीय उत्पादों का ही उपयोग करेंगे। लीलाधर ने कहा कि अपने छोटे बेटे की शादी धूमधाम से करने की जो तैयारी की थी, उस पर नोटबंदी के कारण रोक लग गई है। लीलाधर और उनकी पत्नी शांति देवी गंभीर तनाव में हैं। उनका कहना है कि बैंकों में उनके खाते में जो रुपया जमा है, उसे निकालने की छूट तो मिलनी ही चाहिए। अपने खाते से पैसे निकालने में भी अब पापड़ बेलने पड़ रहे हैं।