शराब विरोधी आंदोलन में सक्रिय महिलाओं का कहना है कि सरकार को सबसे पहले सरकारी दुकानों में राशन, हर व्यक्ति को साफ पानी और समय पर रसोईगैस की सप्लाई करनी चाहिए। शराब की जरूरत किसी को नहीं है। यह सरकार को राजस्व देती है और गरीबों के घरों को उजाड़ती है। महिलाओं ने कहा कि पहाड़ के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। सड़क, स्कूल, बिजली, पानी, स्वास्थ्य की स्थिति ठीक नहीं है। सरकार ने कभी इन जरूरी मुद्दों को हल करने की चिंता नहीं की। सरकार हर हाल में शराब की दुकान खोलना चाहती है, ताकि अपनी आमदनी बढ़ा सके।
महिलाओं ने कहा कि यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि कई लोगों के बलिदान से बने इस राज्य में हर सरकार शराब को ही मुख्य आधार बनाकर चल रही है, जबकि राज्य गठन के समय ही यह तय हो जाना चाहिए था कि चार धामों वाले इस राज्य में शराब नहीं बिकेगी। उन्होंने सरकार से कहा कि यह सबसे अच्छा मौका है कि वह शराब बंद करे। पूरे प्रदेश को नशामुक्त करने के लिए सरकार को पूरी इच्छाशक्ति से काम करना चाहिए।
शराब बंद करने में कोई दिक्कत नहीं
शराब विरोधी आंदोलनकारी हंसा बाफिला का कहना है कि सरकार को शराब बंद करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। राजस्व बढ़ाने के कई उपाय हो सकते हैं। यहां पर उद्यानों से ही सरकार इतनी आमदनी कर सकती है कि शराब की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
स्वास्थ्य सेवा में सुधार की चिंता क्यों नहीं
आंदोलनकारी जयंती देवी का कहना है कि यह प्रदेश के लिए दुर्भाग्य का विषय है कि पूरा सरकारी अमला, सरकार और अधिकारी सिर्फ शराब की दुकान को खोलने की चिंता में डूबे हैं। यदि इतनी चिंता स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की होती तो कुछ भला होता।
आंदोलन के पीछे कोई राजनीति नहीं
स्थानीय निवासी जीवंती देवी का कहना है कि इस आंदोलन के पीछे न तो कोई राजनीति है और न किसी ने उनको भड़काया है। महिलाएं खुद एकजुट होकर शराब के विरोध में खड़ी हुई हैं। पहले भी महिलाएं शराब के विरोध में आंदोलन कर चुकी हैं।
हर महिला के लिए रोजगार का साधन हो
आंदोलनकारी कमला वर्मा का कहना है कि थल को विकास के लिए कई अन्य चीजों की जरूरत है। यहां पर महिलाओं के रोजगार के साधन होने चाहिए। साथ ही हर महिला को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए। शराब की जरूरत किसी को नहीं है।
युवाओं को गुमराह होने से बचाया जाए
आंदोलन में सक्रिय पार्वती देवी का कहना है कि युवाओं को गुमराह होने से बचाने के लिए शराब बंद होनी चाहिए। वह कहती हैं कि नजदीक में शराब की दुकान होगी तो जरूर ज्यादा लोग दुकान तक जाएंगे। इसलिए कस्बे से यह बुराई दूर की जाए।
शराब के खिलाफ संगठित लड़ाई जरूरी
आंदोलनकारी प्रेमा कार्की का कहना है कि शराब के खिलाफ संगठित लड़ाई की जरूरत है, यदि समाज के कुछ लोग इसके पक्ष में हो जाएंगे तो कामयाबी नहीं मिलेगी। वह कहती हैं कि अब महिलाएं आम लोगों को शराब के खिलाफ जागृत करेंगी।
यह बुराई अब समाप्त हो जानी चाहिए
शराब विरोधी आंदोलन में सक्रिय रेखा टम्टा का कहना है कि शराब गरीबों के लिए अभिशाप है। कई घर शराब के कारण उजड़ गए हैं। कई की असमय मौत हो गई है। अब तो इस बुराई को इलाके से पूरी तरह समाप्त करना ही होगा।
शराब की दुकान निरस्त करने का आदेश दे
शराब विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रही सुंदरी वर्मा का कहना है कि शराब के ठेकेदार और प्रशासन की वजह से ही आंदोलन छेड़ना पड़ा है। वह कहती हैं कि थल कस्बे में शराब की दुकान नहीं चाहिए। प्रशासन इसे निरस्त करने का आदेश दे।