पहाड़ के स्कूलों में शिक्षकोें की कमी का खामियाजा वहां के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। गत दिवस डीडीहाट जीआईसी से 35 बच्चों ने अपना नाम कटाया। अब शिक्षकों की कमी से जूझ रहे राजकीय इंटर कालेज बलुवाकोट में इंटर विज्ञान विषय में प्रवेश बंद कर दिए गए हैं। इंटर में विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए एक भी प्रवक्ता नहीं है। यह विद्यालय मुख्यमंत्री हरीश रावत के विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। मुख्यमंत्री की जानकारी में यह मामला है भी। उनके प्रभारी सचिव की ओर से बाकायदा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को यह आश्वासन भी मिला है कि जल्दी प्रवक्ताओं की तैनाती हो जाएगी, लेकिन शिक्षा सत्र शुरू होने पर ही कुछ नहीं हुआ, जिस कारण विज्ञान पढ़ने के इच्छुक बच्चे अन्यत्र विद्यालयों में प्रवेश ले चुके हैं।
जीआईसी बलुवाकोट में प्रवक्ताओं और शिक्षकों के 22 पद सृजित हैं, इनमें से 14 पद इस समय रिक्त चल रहे हैं। 700 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय में इंटर स्तर पर भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, नागरिक शास्त्र और हिंदी विषय पढ़ाने के लिए प्रवक्ता नहीं हैं। इसी तरह हाईस्कूल में गणित, विज्ञान, सामान्य विज्ञान, व्यायाम और हिंदी विषय के अध्यापक नहीं हैं। प्रधानाचार्य का पद भी लंबे समय रिक्त चल रहा है।
बलुवाकोट के पूर्व प्रधान और समाजसेवी हरी राम आर्य ने क्षेत्र भ्रमण के समय मुख्यमंत्री के सामने शिक्षकों के रिक्त पदों का मामला रखा। बाद में वह देहरादून जाकर भी इस समस्या को बता आए थे। हरी राम का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों की तैनाती तो नहीं हुई, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय से सचिव का एक पत्र उनको जरूर मिला है, जिसमें शिक्षकों की तैनाती का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस गरीब इलाके के बच्चे अब इंटर में विज्ञान की शिक्षा लेने से वंचित होते जा रहे हैं।
रिक्त पदों की सूची शासन को भेजी
मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया का कहना है कि जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षकों और प्रवक्ताओं के रिक्त पदों की सूची हर महीने शासन को भेजी जाती है, इसमें जीआईसी बलुवाकोट भी शामिल है। नियुक्ति और स्थानांतरण की नीति शासन ही तय करता है। स्थानीय स्तर पर कोई व्यवस्था संभव नहीं है।