थल के गौचर अस्पताल में खाली पड़ी चिकित्सक की कुर्सी
- फोटो : अमर उजाला
रामगंगा घाटी में महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए गौचर में 15 साल पहले खोले गए महिला अस्पताल की हालत बेहद खराब हो गई है। अस्पताल में 14 वर्षों से महिला डॉक्टर की तैनाती करने में विभाग और सरकारें नाकाम रही हैं। अस्पताल में 10 वर्षों से फार्मेसिस्ट का पद भी रिक्त है। तीन स्टाफ नर्सों के भरोसे अस्पताल संचालित हो रहा है।
गौचर में वर्ष 2003 में महिला उत्थान योजना के तहत महिला अस्पताल खोला गया। अस्पताल में महिला डॉक्टर का एक पद सृजित है। शुरुआत में महिला डॉक्टर की तैनाती की गई। फरवरी 2004 में महिला डॉक्टर का स्थानांतरण हो गया, तब से अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। वर्ष 2008 से अस्पताल में फार्मेसिस्ट का पद भी रिक्त है। अस्पताल में पानी की व्यवस्था भी नहीं है।
थल के साथ ही बांसबगड़, क्वीटी, नाचनी, गूटी, होकरा, मुवानी, राया, बजेता और बागेश्वर के भी कई इलाकों की महिलाएं इस अस्पताल पर निर्भर हैं। अस्पताल में महीने में औसतन 20 से 25 डिलीवरी के मामले आते हैं। डिलीवरी स्टाफ नर्सों के भरोसे होती है। अस्पताल में दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। शुक्रवार दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर अमर उजाला की टीम अस्पताल पहुंची। अस्पताल में कोई भी मरीज भर्ती नहीं था। कुछ महिलाएं टीकाकरण के लिए पहुंची थीं। उनका टीकाकरण हो रहा था।
पदों के सापेक्ष नियुक्ति
महिला डॉक्टर का एक पद सृजित है, वह भी खाली है। फार्मेसिस्ट का पद भी रिक्त है। 2 स्वच्छकों में से एक भी तैनात नहीं है। हेड नर्स का पद खाली है। 3 स्टाफ नर्स तैनात हैं।
जिले को जल्द 15 डॉक्टर और मिलने जा रहे हैं। गौचर महिला अस्पताल में जल्द ही डॉक्टर की तैनाती हो जाएगी।
-डॉ. ऊषा गुंज्याल, मुख्य चिकित्साधिकारी पिथौरागढ़