आठूं महोत्सव समिति, सांस्कृतिक समिति और रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित आठूं महोत्सव बुधवार से रामलीला मैदान में शुरू हो गया है। पहले दिन पितरौटा से लीलावती वर्मा के नेतृत्व में भव्य झांकी निकली, जो मुख्य मार्गों से होते हुए आयोजन स्थल रामलीला मैदान पहुंची। वहां पर गंवरा (गौरा) की प्रतिमा को स्थापित कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को महेश्वर (महेश) की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमाएं घास से तैयार होती हैं। उनको नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
रामलीला मैदान में पूजा-अर्चना के बाद खेल चांचरी की धूम शुरू हो गई। महिलाओं ने-बाटा में इमली को रुख, इमली टिपी खूंला, आ गैछ गंवरा दीदी, हमलै मैत जूंला गीत के साथ गंवरा का स्वागत किया। उसके बाद-रामज्यू वनवास ग्यान सीता गैछ साथ, महल में रूंनी सीता कसिकै रौली वन में और बेड़ू पाको बेड़ू पाको, तिमुली कैले खैछे ला, मेरि इजू त इति लै छ, बाटुली कैल लैछ ला जैसे गीतों से माहौल को रंगीन बना दिया। भारी संख्या में मौजूद महिलाओं ने देर शाम तक झोड़ा, चांचरी की धूम मचा दी।
झांकी के दौरान दिगांस गांव से महेश राम के नेतृत्व में आए छलिया दल ने भव्य प्रस्तुति दी। आज अमुक्ताभरण सप्तमी का पर्व होता है। इस दिन कुमाऊं में गौरा का पूजन किया जाता है। ग्रामीण अंचलों में यह पर्व परंपरागत उत्साह के साथ मनाया जाता है। कुछ गांवों में तो आठूं की धूम पूरे 15 दिन तक चलती है। आठूं महोत्सव को सफल बनाने में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र माहरा, हेमराज बिष्ट, कै. दीवान सिंह वल्दिया, जनार्दन उप्रेती, गोविंद सिंह, विक्रांत पुनेड़ा, शिवराज अधिकारी, दीपक नगरकोटी, राजेंद्र जोशी, उमेश लाल साह, दलीप वल्दिया, मनीष नगरकोटी, रेखा जोशी, रेखा वर्मा, माधवी जोशी, दीपा बोरा, हेमा बोरा आदि सहयोग दे रहे हैं।