पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ विधानसभा से भाजपा ने साफ और सरल छवि की चंद्रा पंत पर फिर भरोसा जताकर उन्हें टिकट दे दिया है। चंद्रा पंत को टिकट मिलने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह दिखा।
चंद्रा पंत ने वर्ष 2019 में पति पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 2019 में हुए उप चुनाव में 51.57 प्रतिशत मत प्राप्त कर विधायक बनी थी। उन्हें उपचुनाव में 26,086 मत मिले थे, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता अंजू लुंठी को 45.11 प्रतिशत मत मिले थे। भाजपा ने चंद्रा पंत के कार्यों और सरल छवि से प्रभावित होकर उन्हें फिर से प्रत्याशी बनाया है। चंद्रा पंत को टिकट मिलने पर भाजपा जिलाध्यक्ष विरेंद्र वल्दिया, पूर्व कुमाऊं मंडल विकास निगम अध्यक्ष केदार जोशी, नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र रावत, जिपं अध्यक्ष दीपिका बोहरा, भाजपा नेता गिरीश जोशी, वरिष्ठ नेता भूपेश पंत सहित कई लोगों ने खुशी प्रकट की है।
चुफाल पर फिर दांव
पिथौरागढ़। डीडीहाट सीट पर भाजपा ने एक बार फिर कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल पर भरोसा जताया है। 1996 से जीत दर्ज करते आ रहे चुफाल को टिकट मिलने पर कार्यकर्ताओं का कहना है कि डीडीहाट विधानसभा में भाजपा प्रचंड जीत दर्ज करेगी।
बिशन सिंह चुफाल ने वर्ष 1996 में उक्रांद के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी को हराया था। इसके बाद से वह इस सीट से लगातार जीतते आ रहे हैं। राज्य गठन के बाद पहली बार 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में बिशन सिंह चुफाल ने कांग्रेस प्रत्याशी रमेश कापड़ी को शिकस्त दी थी। 2007 में कांग्रेस प्रत्याशी हेम पंत, जबकि 2012 में कांग्रेस नेता रेवती जोशी और 2017 में निर्दलीय प्रत्याशी किशन सिंह भंडारी को हराया था।
संगठन में गहरी पैठ से धन की लगी लॉटरी
धारचूला(पिथौरागढ़)। ब्लॉक प्रमुख धन सिंह धामी को जनता के बीच मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं से अच्छा तालमेल का इनाम विधानसभा टिकट के रूप में मिला है। संगठन में अच्छी पकड़ के चलते शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें विधानसभा से उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि ब्लॉक प्रमुख बनने के बाद धन सिंह धामी ने जन हित में कई कार्य किए। आपदा के दौरान वो लगातार क्षेत्र केे जनता के बीच रहे और उनकी समस्याओं के लिए सरकार के बीच मध्यस्थता निभाते रहे। इससे उनकी पकड़ क्षेत्र में लगातार मजबूत होती रही। पर्यवेक्षकों की सर्वे रिपोर्ट में भी मंडलीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उनके नाम पर हामी भरी थी। सियासी जानकारों का कहना है कि कार्यकर्ताओं के बीच बैठ के मामले में पिछली बार के प्रत्याशी स्वामी वीरेंद्रानंद इस मामले में कहीं न कहीं उनका मन नहीं जीत सके हैं।
फकीर के काम आ गई संगठन से नजदीकी
गंगोलीहाट। भाजपा ने वर्तमान विधायक मीना गंगोला का टिकट काटकर फकीर राम टम्टा को अपना उम्मीदवार घोषित किया। विधायक मीना गंगोला के टिकट काटने और फकीर राम टम्टा को टिकट देने के पीछे सबसे बड़ी वजह फकीर राम की भाजपा संगठन में पकड़ बताई जा रही है। दूसरी ओर संगठन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी मीना गंगोला को चुनावी लड़ाई से दूर ले गई है। मीना गंगोला निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी, भाजपा में बनी रहेंगी या अब बगावत करेंगी। इन सब को लेकर उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वे किसी का भी फोन रिसीव नहीं कर रही हैं। व्हाट्सएप पर उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका उत्तर भी उन्होंने नहीं दिया।