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Pithoragarh News: भेड़ पालकों का एफपीओ करेगा भेड़ के जैविक मांस का उत्पादन

Fri, 08 Dec 2023 10:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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मुनस्यारी में भेड़ पालकों को विभागीय जानकारी देते पशुपालन विभाग के डिप्टी सीवीओ डॉ. पंकज जोशी।
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दिनेश अवस्थी
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड भेड़ पालकों की आर्थिकी को बढ़ाने के लिए भेड़ों की नस्ल सुधारने में जुटा है। इसके लिए भेड़ पालकों को ऑस्ट्रेलियाई नस्ल की मरीनो भेड़ (आम भेड़ से बड़ी, अच्छी क्वालिटी का मीट और अधिक ऊन उत्पादन के लिए प्रसिद्ध) के मेढ़े वितरित किए जा रहे हैं। बोर्ड की ओर से धारचूला और मुनस्यारी के भेड़-बकरी पालकों का एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) बनाकर जैविक मांस उत्पादन की तैयारी की जा रही है।
पशुपालन विभाग के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पंकज जोशी ने बताया कि मुनस्यारी और धारचूला में तीन हजार से अधिक भेड़ पालकों के पास करीब 40,000 भेड़ें हैं। मेढ़ वितरण योजना के अंतर्गत मुनस्यारी के 70 भेड़ पालकों को 80 प्रतिशत अनुदान पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मरीनो नस्ल के मेढ़े दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सीमांत की भेड़-बकरियां बुग्यालों से हरा चारा खाती हैं। जैविक मांस होने से इसकी कीमत भी अधिक मिलेगी।
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बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी डॉ. नीरज सिंघल ने बताया कि भेड़ पालकों का संगठन बनाया जा रहा है। इसके लिए अनाथ संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। यह संस्था सीमांत के भेड़ पालकों का ग्रुप बनाकर किसान उत्पादक संगठन बनाएगा। इसके जरिये भेड़ और बकरी के जैविक मांस के उत्पादन का कार्य किया जाएगा। यह संगठन अप्रैल तक गठित हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि मांस को क्षेत्र के आईटीबीपी यूनिट में सप्लाई करने के लिए शासन स्तर पर कवायद चल रही है। यदि विभाग की यह कवायद रंग लाई तो भविष्य में सीमांत के भेड़-बकरी पालकों की आजीविका के साथ ही उनके जीवन स्तर में भी सुधार आने की उम्मीद है। संवाद
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बेहतरीन गुणवत्ता का होता है ऊन

पिथौरागढ़। पशुपालन विभाग के डिप्टी सीवीओ डॉ. पंकज जोशी ने बताया कि मरीनो भेड़ के ऊन की गुणवत्ता काफी बेहतर होती है। इसका उत्पादन भी सामान्य भेड़ की अपेक्षा अधिक होता है। देसी भेड़ से जहां 1.7 किलो ऊन प्रति वर्ष निकलता है, वहीं मरीनो से चार से पांच किलो तक ऊन निकल जाता है। मरीनो का ऊन 500 रुपये किलो तक बिकता है। संवाद
क्या होता है जैविक मांस

कोई एंटीबायोटिक्स, सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन, जीएमओ या कीटनाशक नहीं।
पशुओं के स्वास्थ्य और प्राकृतिक व्यवहार को प्राथमिकता दी जाती है।

सभी पशुधन फीड सौ प्रतिशत जैविक रूप से उत्पादित किया जाता है।

पशु को चारागाह में पाला जाता है और पूरे चराई के मौसम में चराया जाता है।

जैविक मांस उत्पादन पर्यावरण की रक्षा में मदद करता है।
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