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तेंदुए की खाल के साथ पकड़े गए अभियुक्त को चार साल कैद की सजा

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वर्ष 2013 में तेंदुए की खाल के साथ पकड़े आरोपी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधीर तोमर ने चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले में पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण एक व्यक्ति को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया गया है।
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13 अगस्त 2013 को डीडीहाट के वन क्षेत्राधिकारी कुंदन सिंह खाती, वन दरोगा राम सिंह मर्तोलिया, हरीश चंद्र सती और जगत सिंह रावल गश्त पर थे। उन्हें एक व्यक्ति को तेंदुए की खाल के साथ कनालीछीना-छड़नदेव रोड पर होने की सूचना मिली।
वन विभाग की टीम थानाध्यक्ष प्रताप पुरी के साथ मौके पर पहुंची। इस दौरान दो लोग आते दिखाई दिए। टीम ने जैसे ही उन्हें पकड़ने का प्रयास किया तो एक व्यक्ति मौके से भाग निकला। पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम जगत सिंह और भागने वाले व्यक्ति का नाम हरीश सिंह निवासी डीडीहाट बताया। तलाशी लेने पर जगत सिंह के बैग से तेंदुए की खाल बरामद हुई। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में मौके से भागे हरीश सिंह ने न्यायालय में समर्पण कर दिया। मामले की विवेचना उप प्रभागीय वनाधिकारी महिपाल सिंह सिरोही ने की।
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तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. आईपी सिंह ने परिवाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधीर तोमर के न्यायालय में पेश किया। पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह बनकोटी ने की। इस मामले में पांच गवाह पेश किए गए। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अभियुक्त जगत सिंह को चार वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हरीश के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने पर संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया गया।
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