बस्तड़ी आपदा के चार दिन बीतने के बाद भी राज्य सरकार की मशीनरी सक्रिय नहीं हो सकी है। ग्राउंड जीरो पर सेना, आईटीबीपी, एसएसबी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवान मुस्तैदी से खोज, बचाव के काम में लगे हैं। इन जांबाजों की मेहनत से घटना के चार दिन बाद चार मवेशी मलबे के नीचे से जिंदा निकले हैं लेकिन अव्यवस्थाओं का हाल इतना बुरा है कि भारी सड़ांध के बीच काम कर रहे जवानों को मास्क तक ये तंत्र नहीं दिला सका। सांसद प्रदीप टम्टा और कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण की फटकार के बाद स्थल पर काफी कम मास्क पहुंच पाए। सांसद, विधायक ग्राउंड जीरो पर पहुंचे तो वहां पर प्रशासनिक अमले के रूप में पटवारी तक मौजूद नहीं था। विधायक फर्स्वाण ने डीएम, सीएमओ को फोन पर खूब खरीखोटी सुनाई। तभी अमला मौके पर पहुंचा।
सांसद टम्टा और कपकोट विधायक रविवार से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए ये दोनों नेता जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, कनालीछीना के ब्लॉक प्रमुख प्रशांत भंडारी आदि नेताओं के साथ मौके पर थे। सांसद, विधायक के सामने डीडीहाट यूथ सोसायटी और अमर उजाला ने सड़ांध के बीच काम कर रहे राहत कर्मियों को मास्क तक उपलब्ध न होने का मामला उठाया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम एचसी सेमवाल और सीएमओ यूएस अधिकारी को फोन कर मास्क तक उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताई।
विधायक ने सीएमओ को घटना के चार दिन बीतने के बाद भी मौके पर न पहुंचने पर लताड़ लगाई। सीएमओ ने जिले में मास्क की कमी होने की बात विधायक को बताई और कहा कि वह 100 मास्क के साथ मौके के लिए आ रहे हैं, खिरचना में सड़क बंद होने के कारण फंसे हैं, जबकि इसी रास्ते से डीएम, एसपी, मीडिया कर्मी समेत कई विभागों के कर्मचारी सिंघाली पहुंचे थे। इसके बाद विधायक फर्स्वाण का पारा और चढ़ गया। उन्होंने डीएम को फोन कर मौके (बस्तड़ी) पर पहुंचने को कहा।
डीएम समेत सारे अधिकारी जीआईसी सिंघाली स्थित हेलीपैड में सीएम के इंतजार में खड़े थे। ग्राउंड जीरो में भारी अव्यवस्थाओं के बीच सेना, सुरक्षा बलों, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवान लापता लोगों की खोज में जुटे थे। अपराह्न करीब तीन बजे बाद डीएम सेमवाल, एसपी रोशन लाल शर्मा मौके पर पहुंचे। विधायक ने डीएम के सामने फिर लापरवाही का मामला उठाया। डीएम ने एसडीएम सदर अनुराग आर्य को फोन कर 4-5 हजार मास्क बस्तड़ी भेजने को कहा। इसके कुछ देर बाद आपदा प्रबंधन अधिकारी हाथ में थोड़े से मास्क लेकर वहां पहुंचे। कुछ लोगों को मास्क बांटे। बाद में सीएमओ भी मास्क लेकर मौके पर पहुंचे। हादसे के चार दिन बाद मात्र 500 मास्क मौके पर पहुंचे। ग्राउंड जीरो पर सड़ांध से बुरे हाल हैं। लोगों को मुंह ढांपकर खड़ा रहना पड़ रहा है। तमाम सुरक्षा कर्मी बगैर मास्क के खोज, बचाव का काम कर रहे हैं।
विधायक के तेवरों के बाद बस्तड़ी पहुंचे अफसर
रविवार को बस्तड़ी पहुंचे राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक ललित फर्स्वाण के सामने 8 असम रेजीमेंट के कमांडेंट कर्नल जे चौधरी और एनडीआरएफ ने लापतों लोगों की खोज के लिए ग्राउंज जीरो पर जेसीबी पहुंचाने का मामला रखा। सांसद ने उसी समय लोनिवि के उच्चाधिकारियों को दो जेसीबी मशीन बस्तड़ी में लापता लोगों की खोज में लगाने के निर्देश दिए। सोमवार को भी जब स्थल पर जेसीबी नहीं दिखी तो दोनों जनप्रतिनिधि बिफर पड़े। फर्स्वाण का तो पारा आसमान पर था। उन्होंने पहले मौके पर पहुंचे लोनिवि के मुख्य अभियंता सत्येंद्र शर्मा आदि अधिकारियों को लताड़ लगाई। फिर शासन में सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी को लोनिवि की लापरवाही की जानकारी दी। लोनिवि के अफसरों ने शासन से कहा था कि बस्तड़ी के लिए सड़क बनानी पड़ रही है। इसलिए देर हो रही है, जबकि बस्तड़ी के लिए सिंघाली से छह किमी सड़क बनी है। जो आपदा से क्षतिग्रस्त हो गई थी। उसी को ठीक कर जेसीबी ग्राउंड जीरो तक पहुंचानी थी। फर्स्वाण ने लोनिवि की अधिकारियों की लापरवाही सचिव के सामने रखी। इसके बाद लोनिवि के मुख्य अभियंता शर्मा और एसई ने सिंघाली सड़क में काम में लगी जेसीबी को मौके पर लेकर पहुंचे। शाम तक जेसीबी ग्राउंड जीरो में पहुंच गई थी। राहत कार्य में ढिलाई को लेकर लोगों में भी सरकारी तंत्र के खिलाफ गुस्सा था।