पिथौरागढ़। विधानसभा चुनाव में इस बार भी पूर्व सैनिक निर्णायक भूमिका में रहेंगे और वह किसी दावेदार के भाग्य का फैसला करने में अहम रोल निभा सकते हैं। जिले में 16517 पूर्व सैनिक तथा 7348 वीरांगनाएं है। सभी राजनीतिक दल इस संख्या बल को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं। चुनाव के समय इस बार भी पूर्व फौजी वोटर नए समीकरणों को तैयार कर देंगे।
जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार पिथौरागढ़ जिले में पूर्व सैनिकों और सैनिक वीरांगनाओं की कुल संख्या 23865 है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिथौरागढ़ जिले में पूर्व सैनिकों की यह संख्या कुमाऊं मंडल के अन्य जिलों की तुलना में सर्वाधिक है। इस कारण जिले में पूर्व सैनिक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर राजनीतिक दल कोशिश में लगा रहता है। जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के अनुसार जिले में 16517 पूर्व सैनिक तथा 7348 वीरांगनाएं हैं।
कुमाऊं मंडल के अन्य जिलों में पूर्व फौजी और वीरांगनाएं
अल्मोड़ा- 13800
बागेश्वर- 11236
चंपावत- 4446
नैनीताल-13012
यूएसनगर- 8421
पिथौरागढ़। सेना के रिटायर्ड कर्नल एसपी गुलेरिया ने कहा कि पूर्व सैनिकों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। वह कहते हैं कि वन रैंक वन पेंशन के मामले में कई पूर्व सैनिकों के लिए अन्याय हुआ है। वह तो यहां तक कहते हैं कि सुबेदार की पेंशन केंद्र सरकार के चपरासी की पेंशन से भी कम है।
वन रैंक वन पेंशन में अफसरों की पेंशन में ही 10 से 12 हजार रुपए तक का अंतर आया है। पेंशन में इस तरह की विसंगति को दूर किया जाना चाहिए। कर्नल गुलेरिया ने कहा कि राज्य सरकार ने अर्धसैनिक बलों के पेंशनरों के भत्तों तथा अन्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी कर राहत दी है। अन्यथा अर्धसैनिक बलों के पेंशनरों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता।