पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आग लगने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। इस सीजन में अब तक 32 घटनाओं में 28.25 हेक्टेयर जंगल जला है। इसमें पांच हेक्टेयर आरक्षित और 23.25 हेक्टेयर सिविल व पंचायती वन शामिल हैं। आग से वन विभाग को 74,750 रुपये के नुकसान का आकलन है। तमाम दावों और संसाधनों के बाद भी जंगल सुलग रहे हैं और वन विभाग लाचार है।
मई पहले सप्ताह बारिश होने से वनाग्नि पर नियंत्रण हो गया था लेकिन अब गर्मी बढ़ने के साथ ही आग की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। सिविल और पंचायती वनों में आग अधिक लग रही है। पंचायती वनों में आग लगने के बाद सरपंच वन विभाग का मुंह ताकते हैं। इसके चलते कई जगहों पर बहुमूल्य वन संपदा को खासा नुकसान हुआ है।
वनों में आग की घटनाओं को देखते हुए विभाग ने क्रू-स्टेशन और फायर वाॅचरों की संख्या भी बढ़ा दी है। विभाग सभी संसाधन उपलब्ध होने भी दावा कर रहा है। बावजूद इसके दूरस्थ जंगलों एवं चट्टानी इलाकों में आग लगने पर इसे रोकने में कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, थल सहित अन्य हिस्सों में अब भी जंगल वनाग्नि की चपेट में हैं। जंगलों की आग बुझाकर इन्हें सुरक्षित बचाना विभाग के लिए चुनौती बना है।
आग पर नियंत्रण को हैं 72 क्रू-स्टेशन
वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए वन विभाग ने पहले 68 क्रू-स्टेशन बनाए थे। प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि आग की घटनाओं में इजाफा होने के बाद इनकी संख्या बढ़ाकर 72 कर दी गई है। आग बुझाने के लिए पहले 180 फायर वाचर तैनात किए गए थे। अब 210 फायर वाचर तैनात किए गए हैं।
26 वनाग्नि सुरक्षा समितियों को दिया है धन
सीमांत जिले में आग से वनों को बचाने के लिए 26 वनाग्नि सुरक्षा समितियों को 30-30 हजार रुपये की धनराशि दी गई है। जिले में करीब 1550 वन पंचायतें हैं। प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि सुरक्षा समितियां आग बुझाने में सहयोग कर रही हैं।
पिथौरागढ़, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग और डीडीहाट रेंज में आग लगने की घटनाएं अधिक हो रही हैं। सभी वन क्षेत्राधिकारियों को जंगलों में आग लगने पर तुरंत उस पर नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ग्रामीणों से आग बुझाने में सहयोग करने का भी अनुरोध किया जा रहा है। - आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़