पिथौरागढ़/मूनाकोट/थल। फायर सीजन में सीमांत जिले के जंगल धधक रहे हैं। इसके बावजूद वन विभाग ने आग बुझाने के उपाय नहीं किए हैं।
इससे प्राकृतिक वन संपदा और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बाद भी जंगलों की आग बुझाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
मूनाकोट के टाकुला, पीपलतड़ा, लमीजर और तड़ीगांव से लगे जंगलों में शुक्रवार दोपहर से आग लगी है। शाम तक आग ने विकराल रूप ले लिया। इसमें घास, पेड़, पौधे पूरी तरह जल गए।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश चंद ने बताया कि गांव के सुरेश चंद, दुरा देवी, कमला देवी, मीना देवी, लक्ष्मण प्रसाद, जितेंद्र आर्या, लक्ष्मी देवी, शांति देवी ने शुक्रवार रात तक पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया।
इधर सल्मोड़ा थाने के ऊपर दो दिनों से जंगल धधक रहे हैं। इधर धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग, कनालीछीना आदि स्थानों पर भी जंगल जल रहे हैं।
मुनस्यारी रेंज के थल से सात किमी दूर कुमालगुनी वन क्षेत्र के चीड़ के जंगल, डीडीहाट वन क्षेत्र के पमतोड़ी और खाबरचूला के जंगलों में पूरी रातभर आग धधकती रहे।
इससे अनमोल वन संपदा नष्ट हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि घटना की सूचना वनकर्मियों को दे दी गई थी। इसके बावजूद आग बुझाने कोई नहीं आया।
55 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं आग की
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। जिले में 55 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने 1460 किमी लंबी फायर लाइन का निर्माण किया है। कुल 77 क्रू स्टेशन और पांच वॉच टावर बनाए गए हैं। इसके बाद भी जंगलों में आग की घटनाएं कंट्रोल नहीं हो पा रहीं हैं।